Surat News: गुजरात के सूरत शहर से एक बेहद भावुक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 75 वर्षीय बुजुर्ग दंपती ने इच्छामृत्यु (Euthanasia) की मांग करते हुए जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपा है। दंपती का आरोप है कि लगातार प्रशासनिक कार्रवाई और कथित उत्पीड़न के कारण उनका जीवन संकट में आ गया है और अब उनके पास जीने का कोई सहारा नहीं बचा है। बुजुर्ग दंपती के अनुसार, करीब 10 वर्ष पहले पावागढ़ से लौटते समय हुए एक भीषण सड़क हादसे में उनके परिवार के लगभग सभी सदस्य की मौत हो गई थी। दुर्घटना में उनके बेटे, बहू, दो पोते, बेटी, दामाद, उनके दो बच्चों और एक अन्य परिजन की जान चली गई थी। इस हादसे के बाद दोनों बुजुर्ग पूरी तरह अकेले रह गए।
संपत्तियों पर कुछ लोगों की नजर
दंपती का आरोप है कि पांडेसरा क्षेत्र में स्थित उनकी संपत्तियों पर कुछ लोग नजर गड़ाए हुए हैं और कथित रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों तथा प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर उनकी संपत्ति हड़पने की कोशिश की जा रही है। बुजुर्गों के मुताबिक, करीब पांच वर्ष पहले उनकी नौ दुकानों को नगर निगम द्वारा सील कर दिया गया था। उन्होंने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दंपती का दावा है कि उस समय अधिकारियों ने फायर सेफ्टी संबंधी कमियों का हवाला दिया था, लेकिन बाद में फायर विभाग ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि संबंधित दुकानों में किसी विशेष फायर सेफ्टी व्यवस्था की आवश्यकता नहीं थी।
सभी दुकानों को दोबारा सील कर दिया गया
दंपती का कहना है कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर दुकानों को फिर से खोला गया। हालांकि, उनका आरोप है कि 30 मई 2026 को उदना जोन द्वारा बिना कोई स्पष्ट कारण बताए उनकी सभी दुकानों को दोबारा सील कर दिया गया। बुजुर्ग दंपती का कहना है कि इन दुकानों के किराए से ही उनका गुजारा चलता था। दुकानों के दोबारा सील होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और वे मानसिक रूप से भी टूट चुके हैं।
इच्छामृत्यु की मांग करते हुए आवेदन दिया
इसी से परेशान होकर उन्होंने सूरत कलेक्टर कार्यालय में इच्छामृत्यु की मांग करते हुए आवेदन दिया है। बताया जा रहा है कि कलेक्टर कार्यालय ने उनका आवेदन स्वीकार कर लिया है। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, दंपती द्वारा लगाए गए संपत्ति हड़पने, उत्पीड़न और प्रशासनिक दुरुपयोग के आरोप उनके दावों पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
