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West Bengal News: चुनावी माहौल के बीच ED का एक्शन; कोलकाता में पार्थ चटर्जी और प्रसन्न कुमार रॉय के ठिकानों पर छापेमारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के माहौल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो ठिकानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई में तृणमूल कांग्रेस नेता पार्थ चटर्जी का आवास भी शामिल है।

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ED ने कोलकाता में पार्थ चटर्जी के घर पर छापा मारा (फोटो: ANI)

Photo : ANI

West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election 2026) के माहौल के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में दो ठिकानों पर छापेमारी की है। इनमें एक तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता पार्थ चटर्जी का आवास है, जबकि दूसरा ठिकाना प्रसन्न कुमार रॉय का दफ्तर बताया जा रहा है, जो फिलहाल जेल में बंद हैं। जानकारी के अनुसार, एसएससी घोटाले के सिलसिले में पार्थ चटर्जी को जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए तीन बार समन भेजा गया था, लेकिन उन्होंने किसी भी समन का पालन नहीं किया।

प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में हई थी गिरफ्तारी

इससे पहले जुलाई 2022 में उन्हें प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले (Primary Teachers Recruitment Scam) में गिरफ्तार किया गया था और बाद में फरवरी-मार्च 2025 के दौरान सुप्रीम कोर्ट से उन्हें सशर्त जमानत मिली थी। ईडी के अनुसार, पार्थ चटर्जी के खिलाफ प्राथमिक शिक्षकों, एसएससी सहायक शिक्षकों और एसएससी ग्रुप C व D कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। इसी कड़ी में एजेंसी ने उनके आवास पर छापा मारकर जांच को आगे बढ़ाया है।

शहर के सात अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमीन हड़पने और धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े मामले में शहर के सात अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई पीएमएलए 2002 के तहत अमित गांगुली और उसके सहयोगियों के खिलाफ की गई। तलाशी के दौरान एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनकी फिलहाल जांच जारी है। ईडी ने पीएमएलए की धारा 17(1ए) के अंतर्गत कई बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया है। यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग, साजिश और धमकी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

जांच में सामने आया है कि अमित गांगुली और उसके सहयोगी लोगों को झांसा देकर कीमती जमीनों पर अवैध कब्जा कर रहे थे। इसके लिए वे फर्जी एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी, सेल डीड और अन्य दस्तावेज तैयार कर खुद को जमीन का मालिक दर्शाते थे। बाद में इन्हीं कागजात को अदालत में पेश कर लोगों को भ्रमित किया जाता था और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन अपने नाम कराने की कोशिश की जाती थी। इतना ही नहीं, इन फर्जी तरीकों से हासिल की गई जमीनों पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट विकसित कर फ्लैट बेचे गए, जिससे आरोपियों ने भारी अवैध मुनाफा कमाया।

जांच में यह भी पता चला है कि पूरा गिरोह एक तय रणनीति के तहत काम करता था पहले फर्जी दस्तावेज बनाना, फिर कोर्ट में मामला दाखिल कर आदेश लेना और उसके बाद सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कर कब्जे को वैध दिखाना। पुलिस के मुताबिक, अमित गांगुली और उसके साथियों के खिलाफ 20 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें ज्यादातर मामले साउथ 24 परगना जिले से जुड़े हैं। इन मामलों में महंगी जमीनों पर अवैध कब्जा, फर्जी डेवलपमेंट एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग और विवादित जमीनों पर तीसरे पक्ष को अधिकार देने जैसे आरोप शामिल हैं। ईडी इस पूरे प्रकरण में आगे भी जांच जारी रखे हुए है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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