मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोहतास ग्रुप पर ईडी का शिकंजा, 350 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच
- Reported by: अनुज मिश्राEdited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 23, 2026, 08:45 PM IST
ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने रोहतास ग्रुप की 75 अचल और 2 चल संपत्तियों को अटैच किया है। ये संपत्तियां रोहतास ग्रुप के प्रमोटर दीपक रस्तोगी, ग्रुप की सहयोगी कंपनियों, वर्दान टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड, आध्याये रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर एलएलपी और कई बेनामी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज पाई गईं।
ईडी की छापेमारी
उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट से जुड़े एक बड़े घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रोहतास ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत ईडी ने रोहतास ग्रुप से जुड़ी 158.85 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा बाजार मूल्य के हिसाब से इन संपत्तियों की कीमत 350 करोड़ रुपये से अधिक है।
ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने की कार्रवाई
यह कार्रवाई ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने की है, जिसमें कुल 75 अचल और 2 चल संपत्तियां शामिल हैं। अटैच की गई अचल संपत्तियों की बुक वैल्यू करीब 141.21 करोड़ रुपये बताई गई है। ये संपत्तियां रोहतास ग्रुप के प्रमोटर दीपक रस्तोगी, ग्रुप की सहयोगी कंपनियों, वर्दान टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड, आध्याये रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर एलएलपी और कई बेनामी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज पाई गईं। इसके अलावा 17.64 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां हाईनेस इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर मिली हैं। सभी अटैच की गई संपत्तियां लखनऊ में स्थित हैं।उत्तर प्रदेश पुलिस की एफआईआर से शुरू हुई थी जांच
ईडी की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज 83 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। जांच में सामने आया कि रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड ने ‘सुल्तानपुर रोड प्रोजेक्ट’, ‘रायबरेली रोड प्रोजेक्ट’ और ‘रोहतास प्लूमेरिया’ के नाम से कई टाउनशिप योजनाएं लॉन्च की थीं। इन योजनाओं के तहत निवेशकों को 30 महीने के भीतर प्लॉट या फ्लैट का कब्जा देने, या फिर बुकिंग राशि का 150 फीसदी लौटाने का वादा किया गया था।
हालांकि, जांच में खुलासा हुआ कि न तो प्रोजेक्ट्स का कोई ठोस विकास हुआ और न ही निवेशकों को उनका पैसा वापस मिला। हजारों खरीदार अपने निवेश के लिए परेशान होते रहे। ईडी के मुताबिक, निवेशकों से जुटाई गई रकम को जमीन खरीदने में डायवर्ट किया गया और ये जमीनें ग्रुप की सहयोगी कंपनियों और बेनामी लोगों के नाम पर ली गईं।
अक्टूबर 2025 में भी ईडी ने की थी बड़ी कार्रवाई
बाद में इन जमीनों को अलग-अलग कंपनियों के नाम ट्रांसफर कर उन्हें छिपाने की कोशिश की गई। कुछ संपत्तियों को प्रमोटर दीपक रस्तोगी ने अपने नाम कर बैंकों में गिरवी रखा और लोन लेकर अवैध धन को वैध दिखाने का प्रयास किया गया। गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में भी ईडी ने इस केस में 110.05 करोड़ रुपये की 68 संपत्तियां अटैच की थीं। अब तक कुल 268.9 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। ईडी का कहना है कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
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