PACL, WinZO और NH-74 घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, इतने करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच; जानें क्या हैं मामले
- Reported by: अनुज मिश्रा
- Updated Feb 18, 2026, 08:12 PM IST
PACL Ltd. और उससे जुड़ी कंपनियों द्वारा चलाए गए एक बड़े अवैध कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम से जुड़ा है, जिसमें देशभर के लाखों लोगों से हजारों करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए। इस मामले की शुरुआत 19 फरवरी 2014 को दर्ज FIR से हुई थी। यह FIR CBI ने नई दिल्ली में दर्ज की थी।
ईडी का एक्शन (फोटो-ट्विटर)
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को तीन बड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए कई संपत्तियों को अटैच कर लिया है। इनमें देश के बहुचर्चित PACL निवेश घोटाले, WinZO Pvt. Ltd. और NH-74 घोटाला मामले शामिल हैं। PACL निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बहुत बड़ी कार्रवाई करते हुए 10,021.46 करोड़ रुपये की 247 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई PMLA के तहत की गई है। WinZO Pvt. Ltd. के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अमेरिका और सिंगापुर में स्थित विदेशी बैंक खातों में रखी करीब USD 55.69 मिलियन (लगभग ₹505 करोड़) की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की है। वहीं चर्चित NH-74 घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 13.89 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) कर दी हैं।
PACL निवेश घोटाला क्या है
जानकारी के मुताबिक, ये संपत्तियां पंजाब के SAS नगर (मोहाली), रूपनगर, जीरकपुर और मोहाली इलाके में स्थित हैं। यह पूरा मामला PACL Ltd. और उससे जुड़ी कंपनियों द्वारा चलाए गए एक बड़े अवैध कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम से जुड़ा है, जिसमें देशभर के लाखों लोगों से हजारों करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए। इस मामले की शुरुआत 19 फरवरी 2014 को दर्ज FIR से हुई थी। यह FIR CBI ने नई दिल्ली में दर्ज की थी। FIR सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई थी। CBI ने अपनी जांच के बाद 33 आरोपियों जिनमें कंपनी के अधिकारी और अन्य सहयोगी शामिल हैं के खिलाफ चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर एक अवैध निवेश योजना चलाई।
48,000 करोड़ से ज्यादा की ठगी कैसे हुई
चार्जशीट के मुताबिक, PACL ने कृषि भूमि की खरीद और विकास के नाम पर निवेश योजना शुरू की। लोगों को बताया गया कि उनकी रकम से जमीन खरीदी जाएगी और बाद में उसे विकसित कर मुनाफा दिया जाएगा
लोगों से एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। लेकिन ज्यादातर मामलों में न तो जमीन दी गई और न ही पैसा वापस किया गया। देशभर के लाखों निवेशकों से 48,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई गई, जो अब तक वापस नहीं की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2016 को SEBI को आदेश दिया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर. एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करे। इस कमेटी का काम PACL की जमीन बेचकर निवेशकों को उनका पैसा लौटाना था। लेकिन जांच में यह भी सामने आया कि निवेशकों के पैसों से खरीदी गई जमीन को अवैध तरीके से बेचा जा रहा था और संपत्तियों को इधर-उधर किया जा रहा था।
आगे की जांच में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो, जयपुर के जवाहर सर्किल थाना और बेंगलुरु के अट्टीबेले थाना में भी नए केस दर्ज हुए। आरोप है कि निवेशकों के पैसों से खरीदी गई जमीन की अवैध बिक्री, कब्जा और दुरुपयोग किया गया। छापेमारी के दौरान खाली साइन की हुई रजिस्ट्री, साइन की हुई चेक बुक और पहचान पत्र जैसे दस्तावेज बरामद हुए। इससे साफ हुआ कि अवैध कमाई को छिपाने और ठिकाने लगाने की साजिश चल रही थी। ED ने 2016 में ECIR दर्ज किया और 2018 में पहली चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद 2022, 2025 और 2026 में तीन सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की गईं। PMLA की विशेष अदालत इन सभी चार्जशीट पर संज्ञान ले चुकी है।
ताजा कार्रवाई में 247 संपत्तियों को ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ यानी निवेशकों के पैसों से खरीदी गई संपत्ति मानते हुए अटैच किया गया है। अब तक ED इस मामले में भारत और विदेश में मिलाकर करीब 17,610 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अटैच कर चुकी है।
WinZO Pvt. Ltd. के खिलाफ एक्शन
Directorate of Enforcement (ED) ने WinZO Pvt. Ltd. के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अमेरिका और सिंगापुर में स्थित विदेशी बैंक खातों में रखी करीब USD 55.69 मिलियन (लगभग ₹505 करोड़) की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की है। ये खाते WinZO US Inc. और WinZO SG Pte. Ltd. नाम की शेल कंपनियों के हैं, जिन्हें पावन नंदा और सौम्या सिंह राठौर नियंत्रित करते हैं।
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि WinZO ऐप पर खिलाड़ियों को बिना बताए बॉट्स/एआई सॉफ्टवेयर से खेल खिलाया जा रहा था, जबकि उन्हें लगता था कि वे असली खिलाड़ियों से खेल रहे हैं। साथ ही कंपनी ने ग्राहकों के वॉलेट से पैसे निकालने पर भी रोक लगाई थी। ईडी के अनुसार, इस तरीके से कंपनी ने 2021-22 से 2025-26 तक के वित्तीय वर्षों में कुल ₹3522.05 करोड़ की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) की। अब तक ईडी ने इस मामले में ₹1194 करोड़ की संपत्ति फ्रीज/अटैच कर दी है। साथ ही PMLA Special Court में 23 जनवरी 2026 को चार्जशीट (Prosecution Complaint) दाखिल की गई है।
NH-74 घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई
Directorate of Enforcement (ईडी) के देहरादून सब-जोनल ऑफिस ने चर्चित NH-74 घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 13.89 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) कर दी हैं। यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।
क्या है मामला
ईडी ने यह जांच उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के Pantnagar थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। आरोप है कि कुछ लोगों ने राजस्व अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से जमीन से जुड़े पुराने आदेशों को बैकडेट में पास करवाया और बाद में उन्हें राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवा दिया।इन आदेशों के जरिए जमीन को कृषि भूमि से गैर-कृषि (नॉन-एग्रीकल्चर) श्रेणी में दिखाया गया, ताकि NH-74 के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहण के दौरान ज्यादा मुआवजा मिल सके।
किन पर है आरोप
जांच में सामने आया कि दिलबाग सिंह, जरनैल सिंह, बलजीत कौर और दलविंदर सिंह ने इस साजिश के जरिए करीब 26 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त मुआवजा हासिल किया। इससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
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