अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस चर्चित बयान को नया मोड़ दे दिया है जिसमें उन्होंने अमेरिका को 'पतन की ओर बढ़ता राष्ट्र' बताया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए तर्क दिया कि शी जिनपिंग की टिप्पणी दरअसल जो बाइडन प्रशासन के दौरान हुई क्षति के संदर्भ में थी।
"पतन बाइडन के दौर का, अब अमेरिका नंबर-1"
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि जब राष्ट्रपति शी ने अमेरिका को एक ढलते हुए देश के रूप में संदर्भित किया, तो वे 'स्लीपी जो बाइडन' के उन चार वर्षों के दौरान हुए भारी नुकसान की बात कर रहे थे। ट्रंप ने बाइडन प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि खुली सीमाओं, ऊंचे टैक्स, विवादास्पद सामाजिक नीतियों और खराब व्यापार समझौतों के कारण देश ने बहुत कुछ सहा है। ट्रंप का दावा है कि उनके पिछले 16 महीनों के कार्यकाल में अमेरिका ने फिर से 'अविश्वसनीय उत्थान' देखा है। उन्होंने शेयर बाजार के रिकॉर्ड स्तर, रोजगार के नए अवसरों और सेना के आधुनिकीकरण को अपनी सफलता के रूप में गिनाया।
ईरान और वेनेजुएला पर सैन्य जीत का जिक्र
अपने पोस्ट में ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला के संदर्भ में अपनी सैन्य उपलब्धियों का भी बखान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका आज पृथ्वी पर सबसे मजबूत सैन्य शक्ति है और बाहरी देशों द्वारा अमेरिका में रिकॉर्ड 18 ट्रिलियन डॉलर का निवेश किया जा रहा है। ट्रंप के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इतने कम समय में मिली इन सफलताओं पर उन्हें बधाई दी है।
शी जिनपिंग का नरम रुख: "दोनों देश मिलकर बढ़ सकते हैं आगे"
इससे पहले गुरुवार को राजकीय भोज के दौरान शी जिनपिंग का लहजा काफी सौहार्दपूर्ण नजर आया। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि चीन का 'महान कायाकल्प' (Great Rejuvenation) और अमेरिका का 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) एजेंडा एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। शी ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि इन दोनों देशों के बीच का संबंध आधुनिक युग का सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंध है और हमें इसे कभी भी बिगाड़ना नहीं चाहिए।
क्या है 'पश्चिम का पतन' और 'पूर्व का उदय' सिद्धांत?
पिछले कुछ वर्षों में शी जिनपिंग अक्सर कहते रहे हैं कि "पूर्व उदय पर है और पश्चिम पतन की ओर"। हालांकि वह सीधे तौर पर अमेरिका का नाम नहीं लेते, लेकिन बीजिंग के विश्लेषक और सरकारी मीडिया इसे स्पष्ट रूप से अमेरिका के संदर्भ में देखते हैं। बीजिंग का मानना है कि अमेरिका में राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक विभाजन उसके दीर्घकालिक पतन के संकेत हैं। ट्रंप ने अपने संदेश के अंत में उम्मीद जताई कि भविष्य में चीन और अमेरिका के संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत और बेहतर होंगे।
