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'भाजपा में PDA का नहीं सम्मान', अखिलेश का बड़ा वार; बोले-'अपनापन बढ़ाओ, समाजवादी सरकार बनाओ'

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पीडीए समाज के लोग यदि व्यक्तिगत स्वार्थ त्यागकर एकजुट हो जाएं, तो सदैव के लिए पीडीए की सरकार बन सकती है। इससे कोई भी व्यक्ति पीड़ित या अपमानित नहीं होगा, क्योंकि पीडीए का मूल भावनात्मक सिद्धांत 'प्रेम, दया और अपनापन' है।

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (@yadavakhilesh)

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टियां पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोटर्स पर नजर बनाए हुए हैं। खासकर, समाजवादी पार्टी ने प्रदेश में 'पीडीए' को लेकर अलग-अलग मायने बताए हैं। हाल के दिनों में मूल नारे का मतलब समझाते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 'पीडीए' का मतलब पंडित बताया था। हालांकि, सपा की इस मजबूत कड़ी की काट में एनडीए गठबंधन के भीतर एक नए प्लान पर काम चल रहा है, जिसे समाज के इस बतके को साधने का नया पैंतरा बताया गया। खुद अखिलेश यादव ने कहा कि 'भारतीय जनता पार्टी अपनी हार सामने देखकर, ‘पीडीए’ के दबाव-जवाब में अपने सहयोगी दलों को इधर-उधर छटकने से बचाने के लिए आरएलडी (RLD) को करीब 73, SBSP को 39, निषाद पार्टी को 31 और अपना दल (एस) को 19 सीटें ऑफर करने की बात कही थी। अब उन्होंने कहा है कि बीजेपी में कभी PAD को सम्मान नहीं मिलने वाला है।

अखिलेश ने पीडीए की एकजुटता पर दिया जोर

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट के माध्यम से पीडीए को लेकर एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि यदि संपूर्ण पीडीए समाज के लोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थ और लाभ का त्याग करके पूरी तरह से एकजुट हो जाएं, तो देश और प्रदेश में सदैव के लिए पीडीए की सरकार बन सकती है। इसके बाद किसी भी समाज का कोई भी व्यक्ति कभी भी 'पीड़ित, दुखी या अपमानित' महसूस नहीं करेगा। अखिलेश यादव ने इस बात पर जोर दिया कि 'पीडीए' का मूल और भावनात्मक सिद्धांत 'प्रेम, दया और अपनापन' पर आधारित है, जो समाज को जोड़ने का काम करता है।

अखिलेश यादव लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि सत्तारूढ़ दल सामाजिक न्याय और आरक्षण के वास्तविक अनुपात को साधने में नाकाम रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि इस कथित फॉर्मूले को जनसंख्या और ‘पीडीए’ (PDA) के उस बड़े अनुपात के मुकाबले परखा जाए, जिसकी बात विपक्षी दल शिद्दत से उठा रहे हैं, तो यह संख्या उसके आधे से भी काफी कम बैठती है।

आपको बता दें कि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी गठबंधन ने कुल 125 सीटें जीती थीं, जिनमें केवल सपा की 111 सीटें थी। लिहाजा अखिलेश यादव 2027 में अपने वोट बैंक को साधने के लिए पीडीए का नारा दिया है, जिसको लेकर वे प्रमुखता से हर जनसभा और बयानों में जिक्र करते हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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