Mumbai News: मुंबई में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर मराठी साइनबोर्ड लगाने को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक सख्ती एक बार फिर चर्चा में है। मुंबई के उप महापौर संजय घाडी ने शहर के सभी दुकानदारों और होटल मालिकों को चेतावनी दी है कि वे जल्द से जल्द देवनागरी लिपि में ठोस मराठी साइनबोर्ड प्रदर्शित करें, नहीं तो उन्हें 'शिव सेना-स्टाइल' की कार्रवाई झेलनी होगी।
एक महीने की समय सीमा और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
संजय घाडी ने स्पष्ट किया कि यह नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इन साइनबोर्ड्स को दुकानों पर प्रमुख रूप से दिखाया जाना चाहिए, न कि किसी कोने में। उप महापौर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि प्रतिष्ठान एक महीने के अंदर मराठी साइनबोर्ड नहीं लगाते हैं, तो प्रशासन कड़े कदम उठाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पार्टी कार्यकर्ता 'शिव सेना के तरीके' से अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
9 लाख दुकानों की निगरानी और भारी जुर्माना
आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में करीब 9 लाख पंजीकृत दुकानें और प्रतिष्ठान हैं। प्रशासन की सतर्कता के बावजूद लगभग 5,020 प्रतिष्ठान अब भी इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। नगर निकाय द्वारा की गई अब तक की कार्रवाई में 3,114 प्रतिष्ठानों के खिलाफ आधिकारिक तौर पर जुर्माना लगाया गया है। उल्लंघन करने वाले इन दुकानदारों से अब तक कुल 1.91 करोड़ की राशि जुर्माने के रूप में वसूल की जा चुकी है। प्रशासन का कहना है कि इस मुहिम का उद्देश्य स्थानीय भाषा का सम्मान सुनिश्चित करना और न्यायालय के आदेशों का पूर्णतः पालन करवाना है।
क्या कहता है नया नियम?
BMC के आदेश के अनुसार अब सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों को अपने नाम मराठी भाषा में देवनागरी लिपि में लिखना अनिवार्य होगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मराठी अक्षर साफ और स्पष्ट दिखने चाहिए तथा अन्य भाषाओं के साइनबोर्ड की तुलना में बड़े या उतने ही प्रमुखता से होने चाहिए। यह नियम दुकानों, रेस्टोरेंट, होटलों, कॉर्पोरेट दफ्तरों, कमर्शियल स्पेस और रिटेल आउटलेट्स पर लागू होगा। नगर निगम ने चेतावनी दी है कि इस निर्देश की अनदेखी करने वाले कारोबारों पर महाराष्ट्र दुकानें और प्रतिष्ठान अधिनियम तथा निगम के नियमों के तहत जुर्माना या कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यहां तक कि फाइव-स्टार होटल और कॉर्पोरेट टावर भी यदि नियम का पालन नहीं करते हैं तो प्रति कर्मचारी 2,000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद निरीक्षण अभियान चलाकर नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य मराठी भाषा की पहचान को मजबूत करना और स्थानीय भाषा में साइनबोर्ड लगाने से जुड़े पुराने राज्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
