दिल्ली पुलिस का बड़ा ऑपरेशन; ट्रैफिक धोखाधड़ी और जबरन वसूली से जुड़े दो आरोपी गिरफ्तार
- Edited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Feb 1, 2026, 08:54 PM IST
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (एआरएससी) ने ट्रैफिक धोखाधड़ी और जबरन वसूली से जुड़े दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में आमिर चौधरी और संजय गुप्ता शामिल हैं, जबकि इससे पहले 10 अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका था। यह गिरोह सरकारी अधिकारियों और कमर्शियल वाहन चालकों को ब्लैकमेल और फर्जी स्टिकर के जरिए धोखा देता था।
दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक फ्रॉड और एक्सटॉर्शन रैकेट का पर्दाफाश किया (सिंबॉलिक फोटो)
Delhi News: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (एआरएससी) ने रविवार को ट्रैफिक धोखाधड़ी और जबरन वसूली से जुड़े दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में आमिर चौधरी सिकंदर और संजय गुप्ता शामिल हैं। इससे पहले इस मामले में 10 अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया जा चुका है।
क्राइम ब्रांच ने यह कार्रवाई दो अलग-अलग ऑपरेशनों के दौरान की। पहले ऑपरेशन में जीशान अली के नेतृत्व वाले गिरोह के सक्रिय सदस्य आमिर चौधरी को पकड़ा गया। यह गिरोह ट्रैफिक पुलिस और अन्य सरकारी कर्मचारियों का वीडियो चुपके से बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता और पैसे वसूलता था। सुल्तानपुरी निवासी आमिर चौधरी पेशे से टैक्सी ड्राइवर है। एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल की टीम ने उसे एक सरकारी अधिकारी से जबरन वसूली करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। उसके पास से 60,000 रुपये और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
लंबे समय से थी तलाश
दूसरे ऑपरेशन में पुलिस ने कुख्यात गैंग लीडर राजकुमार के मुख्य सहयोगी संजय गुप्ता को गिरफ्तार किया। करावल नगर के रहने वाले संजय गुप्ता पेशे से ट्रांसपोर्टर है। वह ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान उनके वीडियो रिकॉर्ड करके उसमें हेरफेर करते थे और इन वीडियो का इस्तेमाल पुलिसकर्मियों को धमकाकर पैसे वसूलने के लिए करते थे। संजय गुप्ता के खिलाफ पहले भी जबरन वसूली, डकैती और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले दर्ज हैं और पुलिस उसे लंबे समय से ढूंढ रही थी।
10 अन्य आरोपियों की हुई थी गिरफ्तारी
जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह कमर्शियल वाहन चालकों को भी धोखा देता था और फर्जी स्टिकर व अवैध सिस्टम के जरिए चालान से बचने में मदद करता था। क्राइम ब्रांच की एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल ने सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मामले की आगे जांच जारी है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक धोखाधड़ी और जबरन वसूली में शामिल 10 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें एक आरोपी ऐसे गैंग का हिस्सा था, जो नो-एंट्री घंटों के दौरान वाणिज्यिक वाहनों की अवैध आवाजाही सुनिश्चित करता था।
कौन था गैंग का मुखिया?
पुलिस ने बताया कि एआरएससी ने रिंकू राणा उर्फ भूषण को भी गिरफ्तार किया, जो इस गैंग का सरगना था। वह वाणिज्यिक वाहन मालिकों और चालकों को अवैध स्टिकर बेचता था और इसके लिए प्रत्येक वाहन से मासिक 2,000 से 5,000 रुपए वसूलता था। ये स्टिकर ट्रैफिक नियमों से छूट का भ्रामक दावा करते थे, जिससे वाहन प्रतिबंधित समय में भी बिना रोक-टोक चल सकते थे।
(इनपुट - आईएएनएस)
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