दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) के टर्मिनल-1 का उद्घाटन 15 अप्रैल को होगा। इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पिछले साल जून में इसी टर्मिनल की छत गिरी थी। इसके बाद इसे बंद कर फिर से निर्माण किया गया है। अब यह नए रूप में दिखेगा। आइए जानते हैं टर्मिनल-1 की खासियत के बारे में।
एयरपोर्ट के इस टर्मिनल को पर्यावरण को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। ये टर्मिनल ग्रीन बिल्डिंग है, जिसमें प्राकृतिक प्रकाश के साथ पर जोर दिया गया है, साथ ही पर्यावरण के प्रति जागरूक करने की पहल की गई है। प्राकृतिक प्रकाश ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र को रोशन करेगा। देशभर के पारंपरिक और लोककला चित्र पूरे टर्मिनल में लगा गए हैं।
दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने यात्रियों की सहूलियत के लिए टर्मिनल के क्षेत्र को 55,740 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 206,950 वर्ग मीटर किया है। इस टर्मिनल में 29 एंट्री गेट के साथ शॉपिंग और डाइनिंग एरिया, प्रेयर रूम, योगा एरिया, लाउंज, और स्मार्ट वॉशरूम भी बनाए गए हैं।
यात्रियों की सुविधा और उनके सफर को आसान बनाने के लिए यहां अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। यहां के सभी एंट्री गेट्स फेस रिकग्निशन सिस्टम आधारित डिजियात्रा सुविधा से टर्मिनल-1 के सभी प्रवेश द्वार लैस है। इससे सुरक्षा में मदद मिलेगी।
सुरक्षा जांच को तेज और आसान बनाने के लिए 20 ऑटोमेटेड ट्रे रिट्राइवल सिस्टम लगाए गए हैं। साथ ही टर्मिनल में 70 मीटर लंबाई के 10 बैगेज रीक्लेम कैरोसिल भी होंगे। बैगेज हैंडलिंग क्षमता को 3,240 बैग प्रति घंटा से बढ़ाकर 6,000 बैग प्रति घंटा किया गया है। सुविधाओं में 20 ऑटोमैटिक ट्रे रिट्रीवल सिस्टम (ATRS) और 36 सेल्फ बैगेज ड्रॉप (SBD) कियोस्क शामिल हैं।
IGI एयरपोर्ट पर अभी तीन टर्मिनल हैं। इनमें टर्मिनल 1 व टर्मिनल 2 का इस्तेमाल सिर्फ घरेलू उड़ानों के लिए होता है। टर्मिनल 2 से इस समय इंडिगो और अकासा एयर की करीब 270 उड़ानें होती हैं। रोजाना यहां करीब 46 हजार यात्रियों का आना-जाना होता है। करीब 40 साल पुराने टर्मिनल 2 में चल रहे मरम्मत के कारण ये सभी उड़ानें अब टर्मिनल 1 से संचालित होंगी।