Sanatan Dharma Controversy: सनातन धर्म पर देश भर में जारी विवाद के बीच सोमवार 25 सितंबर को सैंकड़ों साधु-संतों ने तमिलनाडु भवन के निकट द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनका पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने सनातन धर्म को लेकर इसी प्रकार के बयान देने वाले तथा द्रमुक नेता को समर्थन देने वाले अन्य नेताओं के खिलाफ भी नारेबाजी की। ‘दिल्ली संत महामंडल’ के बैनर तले प्रदर्शनकारी तख्तियां लिए हुए थे, जिनमें उदयनिधि स्टालिन तथा अन्य की निंदा करने वाली पंक्तियां लिखी हुई थीं। प्रदर्शनकारी सरोजिनी नगर में एक मंदिर से तमिलनाडु भवन की ओर रवाना हुए।
हालांकि पुलिस ने उन्हें अफ्रीका एवेन्यू पर रोका जिसके बाद उन्होंने उदयनिधि और अन्य के पुतले फूंके। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुखों को अपने नेताओं को ‘सनातन धर्म’ के खिलाफ बयान जारी करने से रोकना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने साथ ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन से अपने बेटे के कृत्य के लिए माफी की मांग की।
राजनेताओं के खिलाफ की जानी चाहिए कड़ी कार्रवाई
वहीं, दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष नरायण गिरि महाराज ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार की चुप्पी से वह हैरान हैं। उन्होंने कहा कि ‘यहां तक की उच्चतम न्यायालय ने भी सनातन धर्म के खिलाफ नेताओं के घृणा भाषण का संज्ञान लिया। सनातन धर्म के खिलाफ नेताओं की जो भाषा है वह सुमदायों के बीच द्वेष पैदा करती है और इस प्रकार के राजनेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।’
स्टालिन ने सनातन धर्म की डेंगू से की थी तुलना
बात दें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने हाल में सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी और इसके उन्मूलन की बात कही थी, जिसके बाद देश भर में विवाद पैदा हो गया था।
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