Delhi: दिल्ली के खानपुर इलाके में स्थित तीन परिसरों में ईडी ने छापेमारी की है। यह छापेमारी फर्जी कॉल सेंटर के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act) के प्रावधानों के तहत की जा रही है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इन कॉल सेंटरों से अमेरिका समेत विदेशों में रहने वाले नागरिकों को माइक्रोसॉफ्ट विंडोज जैसे मूल सॉफ्टवेयर के नाम पर फर्जी या पायरेटेड सॉफ्टवेयर बेचे जा रहे थे। इसकी सूचना मिलने पर ईडी ने छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई की। बता दें कि छापेमारी 31 जुलाई 2025 की रात करीब 10.30 बजे की गई थी। इस दौरान जांच में पता लगा कि पिछले कुछ सालों में (2016-17 और 2024-25 में 100 करोड़ की राशि प्राप्त की गई है। ईडी इसकी जांच में जुटी हुई है। बताया जा रहा है कि यहां ईडी की कार्रवाई अभी भी जारी है।
बता दें कि मनी लॉड्रिंग के अलावा 'नकली बैंक गारंटी रैकेट' मामले में भी ED ने जांच शुरू कर दी है। नवंबर 2024 में दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (EOD) ने एक मामला दर्ज किया था, जिसके आधार पर ईडी ने कार्रवाई शुरू की है। मामले में ईडी ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कई ठिकानों पर छापे मारे। भुवनेश्वर में बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों से जुड़े 3 परिसर पर छापेमारी की गई। इतना ही नहीं, कोलकाता में इसके एक सहयोगी के ठिकाने पर कार्रवाई हुई।
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि ओडिशा स्थित बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशक और सहयोगी 8 प्रतिशत कमीशन पर फर्जी बैंक गारंटी जारी करने में शामिल थे। इन लोगों ने कमीशन के लिए फर्जी बिल जारी किए। कई अघोषित बैंक खातों का पता चला है, जिनमें कथित तौर पर करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेनदेन हुए। ईडी की जांच में कई कंपनियों के साथ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का भी पता चला है।
(इनपुट - आईएएनएस)
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