तो क्या दाल के दाने से हुआ था इस मस्जिद का निर्माण? ये प्रश्न इसलिए क्योंकि जिस मस्जिद की बात आज हम कर रहे हैं उसका नाम ही मोठ मस्जिद है। दाल को मोठ भी कहा जाता है, इसलिए यह प्रश्न स्वाभाविक है। दिल्ली में घूमने-फिरने की काफी जगहें हैं। पर्यटन के लिहाज से दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत का कोई मुकाबला नहीं है। लेकिन इसके बावजूद कुछ ऐसी ऐतेहासिक जगहें हैं, जिनके बारे में लोग कम जानते हैं। शायद वजह यह भी हो सकती है कि इन ऐतिहासिक जगहों ने अपनी वो भव्यता खो दी है, जो एक समय हुआ करती थी। या लोगों को इन जगहों के बारे में बताया नहीं जाता है। वजह चाहे जो हो... मोठ मस्जिद भी ऐसी ही एक जगह देश की राजधानी दिल्ली में मौजूद है। चलिए जानते हैं मोठ मस्जिद के बारे में सब कुछ -
किसने बनाई मोठ मस्जिद
मोठ मस्जिद को मोठ की मस्जिद भी कहा जाता है और इसे 1505 में लोदी वंश के शासन काल में बनाया गया था। उस समय यहां सिकंदर लोदी का शासन था और उनके वजीर मियां भोईया ने इसे बनाया था। उस समय यह नए तरह की मस्जिद थी, जिसका लेआउट स्क्वायर शेप में था। यहां कुरान की आयतों को इरानी डिजाइन में लगाया गया है, जो देखने में बड़े खूबसूरत लगते हैं।
मोठ मस्जिद को बलुआ पत्थर के ऊंचे चबूतरे पर बनाया गया है। चौकोर लेआउट पर बनी इस मस्जिद के गुंबदों के डिजाइन में हिंदू और इस्लामिक वास्तुकला का अनोखा नमूना देखने को मिलता है। मस्जिद दो मंजिला बनाई गई है, जिसमें 3 गुंबद हैं।
मोठ मस्जिद बनने की कहानी
मोठ मस्जिद बनने की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। यह अन्न की महत्ता को भी बताती है और संदेश देती है कि कभी भी सामने पड़े अनाज का तिरस्कार नहीं किया जाना चाहिए। कहा जाता है कि एक बार सिकदंर लोदी नमाज के लिए पास की एक मस्जिद में गए थे। यहां जब उन्होंने घुटने टेके तो पक्षी की चोंच से मोठ यानी दाल का एक दाना गिरा, जिसे सिकंदर लोदी ने उठा लिया और अपने वजीर मियां भुईयां को दे दिया। मियां भुईयां ने उस दाने को बगीचे में बो दिया। उससे होने वाले पौंधे से जो बीज निकले उन्हें भी कई वर्षों तक बार-बार बोया गया। वजीर ने दाने से पैदा हुई फसल को बेचकर खूब पैसा कमाया और सिकंदर लोदी की इजाजत से साल 1505 में एक मस्जिद बनवाई। क्योंकि यह मस्जिद मोठ बेचकर कमाए गए पैसे से बनाई गई थी, इसलिए इसका नाम मोठ मस्जिद रखा गया।
कहां है मोठ मस्जिद
दक्षिण दिल्ली में मौजूद साउथ एक्सटेंशन-2 के पास मस्जिद मोठ गांव है और इसी गांव में यह मस्जिद है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से इसकी दूरी सिर्फ 21 किमी है। मोठ मस्जिद के आसपास कई पर्टयन स्थल हैं, जहां पर बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। इनमें हौज खास, सीरी फोर्ट, कालकाजी मंदिर, लोटस टैम्पल, निजामुद्दीन औलिया की दरगाह और चिराग देहलवी की दरगाह भी शामिल है। लेकिन मोठ मस्जिद में एकदम वीराना पसरा रहता है। यहां पर नमाज भी नहीं होती है, लेकिन पुरातत्व विभाग (ASI) के संरक्षण में इतिहास के इस पन्ने को सहेजकर रखा गया है।
कब और कैसे जाएं मोठ मस्जिद
मोठ मस्जिद सुबह सूर्योदय से लेकर शाम को सूर्यास्त तक सातों दिन खुली रहती है। यहां पर आने के लिए किसी तरह का टिकट नहीं लगाया गया है आप बिना किसी परेशानी के यहां पहुंच सकते हैं। मोठ मस्जिद आने के लिए आपको दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन में सवार होना होगा और यहां का नजदीकी मेट्रो स्टेशन साउथ एक्स है। इसके अलावा दिल्ली के तमाम इलाकों से साउथ एक्स के लिए डीटीसी की बसें चलती हैं। रिंग रोड पर मौजूद साउथ एक्स के पास ही मौजूद मोठ मस्जिद तक आप चाहें तो अपनी गाड़ी से भी आ सकते हैं।
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