राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पटियाला हाउस में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ सिंह ललेर ने जीएसटी चोरी के एक मामले में एक आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया। इतना ही नहीं याचिका खारिज करते हुए न्यायाधीश द्वारा उस पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जीएसटी चोरी के मामले में आरोपित, कपिल अरोड़ा ने अक्टूबर 2024 के सीसीटीवी फुटेज की मांग की थी, जिसे अदालत ने निरर्थक और न्याय प्रणाली के दुरुपयोग का उदाहरण बताया।
न्यायाधीश ने गैरकानूनी रास्तों के कारण न्याय प्रणाली धीमी होती है
जीएसटी चोरी मामले पर आरोपी की याचिका खारिज करते हुए न्यायाधीश सौरभ सिंह ललेर ने यह भी कहा कि सक्षम और धनवान वादी जब गैरजरूरी और गैरकानूनी रास्ते अपनाते हैं, तो इससे न्याय प्रणाली धीमी होती है और वास्तविक वादियों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सीसीटीवी बैकअप की 30 दिन की सीमा समाप्त हो चुकी थी, जिससे इस याचिका का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
जुर्माने की राशि एक सप्ताह में जमा करने के दिए आदेश
न्यायाधीश ने कहा कि जीएसटी चोरी जैसे मामलों की जांच मुख्यत: दस्तावेजों पर आधारित होती है और पुराने फुटेज को फोरेंसिक तरीके से पुनः प्राप्त करना बेहद कठिन है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामले न्याय में अनावश्यक बाधा डालते हैं। जुर्माने की राशि को एक सप्ताह के भीतर प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का निर्देश दिया गया है। सीजीएसटी विभाग ने इस याचिका पर कोई उत्तर दाखिल नहीं किया था।
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