दिल्ली

Delhi: पुराना वाहन Scrap कराने पर Road Tax में मिलेगी छूट, कितना होगा फायदा?

दिल्ली में पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने के बाद नई गाड़ी खरीदने पर रोड टैक्स में छूट मिलेगी। यह योजना उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा मंजूर की गई है। पुरानी गाड़ी को स्क्रैप कराने के लिए डीलर से एक सर्टिफिकेट डिपॉजिट लेना अनिवार्य होगा, जिससे नई गाड़ी खरीदने पर टैक्स में छूट प्राप्त होगी।

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(सांकेतिक फोटो)

दिल्ली में पुराने वाहनों को स्क्रैप कर नए वाहनों की खरीद पर रोड टैक्स में छूट की योजना लागू हो गई है। यह योजना भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई है, जिसे अक्टूबर में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंजूरी दी थी। अब, पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर मिलने वाली राशि के साथ-साथ रोड टैक्स में भी छूट मिलेगी, जिससे दिल्लीवासियों को राहत मिलेगी। वर्तमान में, दिल्ली में अन्य राज्यों के स्क्रैप डीलर काम कर रहे हैं, और एनसीआर की 13 से अधिक कंपनियां इस कार्य में संलग्न हैं।

वाहन स्क्रैप कराने के बाद, उपभोक्ताओं को डिपॉजिट सर्टिफिकेट प्राप्त करना आवश्यक है, जो नए वाहन की खरीद पर 10 से 20 प्रतिशत तक रोड टैक्स में छूट प्रदान करता है। यदि उपभोक्ता नया वाहन नहीं खरीदते हैं, तो यह सर्टिफिकेट किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित किया जा सकता है। स्क्रैप वैल्यू वाहन के मॉडल के अनुसार निर्धारित होती है, और डीलर गाड़ी के फोटो भेजने के बाद ही मूल्य बताते हैं।

किसमें कितनी छूट?

गैर-परिवहन वाहनों के लिए नए पेट्रोल/सीएनजी/एलपीजी वाहनों पर 20% और डीजल वाहनों पर 15% टैक्स छूट मिलेगी। परिवहन वाहनों के लिए, पेट्रोल/सीएनजी/एलपीजी वाहनों पर 15% और डीजल वाहनों पर 10% छूट मिलेगी। दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग अब तक 61 लाख से अधिक वाहनों का पंजीकरण रद्द कर चुका है, जबकि वर्तमान में 78 लाख वाहन पंजीकृत हैं।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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