Delhi News: दिल्ली सरकार का एक ऐसा फैसला आया है, जो कुछ लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। दिल्ली सरकार ने अगले आदेश तक EWS सर्टिफिकेट जारी करना बंद कर दिया है। पुराने EWS सर्टिफिकेटों में गड़बड़ी के संदेह के चलते ये फैसला लिया गया है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में अपात्र लोगों को EWS सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। इनकी जांच के बाद ही अगला आदेश आने की संभावना है। इससे स्कूली छात्रों पर असर पड़ने की आशंका है। यूनिवर्सिटी की प्रवेश लेने के लिए इस सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है। इसको लेकर मंगलवार को पक्ष-विपक्ष आमने सामने नजर आए।
क्या होता है EWS सर्टिफिकेट
EWS या इकोनॉमिक वीकर सेक्शन सर्टिफिकेट उन लोगों को जारी किया जाता है जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में आते हैं। इससे शिक्षा और नौकरी के अवसरों में 10 फीसदी आरक्षण मिलता है। ये आरक्षण खास तौर पर उन उम्मीदवारों पर लागू होता है, जो पहले से किसी आरक्षण श्रेणी में नहीं आते हैं। विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए इस सर्टिफिकेट की जरूरत होगी। इस फैसले का छात्रों पर असर पड़ेगा।
राजस्व विभाग का आया निर्देश
दिल्ली सरकार ने 9 अप्रैल को जारी आदेश में ये बातें कही थीं। सभी जिलाधिकारियों और राजस्व विभाग के अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय मीटिंग में यह फैसला लिया गया। सिविल लाइंस स्थित दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग मुख्यालय से डिप्टी कमीश्नर संजीव मित्तल की ओर से जारी और संबंधित अधिकारियों को भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि सरकार अब तक जारी किए गए EWS सर्टिफिकेटों की जांच करेगी। अगले आदेश तक राजस्व विभाग कोई नया प्रमाण पत्र जारी नहीं करेगा।
आप ने लगाया आरोप
मंगलवार को दिल्ली में EWS सर्टिफिकेट जारी करने को लेकर विवाद बढ़ गया जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी आम आदमी पार्टी के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी के नेताओं पर बड़े पैमाने पर घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2015 से 2024 के बीच उनके दबाव में फर्जी EWS और जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए, जिससे स्कूल में दाखिले, अस्पताल सेवाओं और सरकारी लाभों तक अवैध पहुंच संभव हो गई। दूसरी तरफ जवाब में आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर EWS प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक लगा रही है ताकि वंचितों को निजी स्कूलों और अस्पतालों में 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ न मिल सके।
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