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दिल्ली में धुआं-धुआं हुआ पटाखा बैन का आदेश, जमकर आतिशबाजी के बाद जहरीली हुई हवा, AQI 'खतरनाक' श्रेणी में पहुंचा

Delhi Air Pollution: राजधानी दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन के आदेश का जमकर उल्लंघन हुआ। सबसे ज्यादा पूर्वी और पश्चिमी दिल्ली से आतिशीबाजी की खबरें सामने आईं, जिस कारण दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ गया और हवा में धुएं की चादर छाई हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में सांस की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है।

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दिल्ली में वायु प्रदूषण।

Photo : ANI

Delhi Air Pollution: देश की राजधानी दिल्ली में पटाखों पर बैन का आदेश गुरुवार रात धुआं-धुआं हो गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। नतीजतन वायु की गुणवत्ता (Delhi AQI) 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गई। रात 10 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 330 दर्ज किया गया। जबकि, सुबह एक्यूआई बढ़कर 395 तक पहुंच गया।

दीवाली की रात 8 बजे बजे ही कई इलाकों में भारी प्रदूषण रिकॉर्ड किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, आनंद विहार, पटपड़गंज, ओखला, अशोक विहार, नेहरू नगर जैसे कई इलाकों में रात 10 बजे के करीब पीएम 2.5 का लेवल 850 से 900 तक पहुंच गया। वहीं, कुछ इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के करीब पहुंच गया है।

पिछले साल से ज्यादा दर्ज किया गया AQI

पिछले साल दिवाली पर आसमान साफ था और अनुकूल मौसमी संबंधी परिस्थितियों के कारण एक्यूआई 218 दर्ज किया गया था। इसके उलट इस साल दिवाली पर शहर में प्रदूषण का स्तर फिर से अपने चरम पर पहुंच गया। सबसे ज्यादा पूर्वी और पश्चिमी दिल्ली के इलाकों में पटाखा बैन के उल्लंघन खबरें आईं, जिस कारण दिल्ली का बीते 24 घंटे का औसत एक्यूआई 330 दर्ज किया गया, जो पिछले दिन 307 था। रात नौ बजे पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर क्रमश: 145.1 और 272 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक बढ़ गया।

पूरे एनसीआर में छाई धुएं की चादर

पश्चिमी दिल्ली में प्रतिबंध का व्यापक रूप से उल्लंघन किया गया और जौनपुर, पंजाबी बाग, बुराड़ी और ईस्ट ऑफ कैलाश जैसे इलाकों में खूब पटाखे फोड़े गए । नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम सहित दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में एक्यूआई ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया जबकि फरीदाबाद में एक्यूआई 181 दर्ज किया गया। फिर भी, प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों, वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन, स्थानीय प्रदूषण और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण दिल्ली-एनसीआर में धुंध की स्थिति और खराब हो गई, जो सर्दियों में चरम पर होती है।

दिल्ली में दिवाली के मौके पर AQI

सालदिल्ली में AQI
2023 218
2022312
2021382
2020414
2019337
2018281
2017319
2016431

हरियाणा-पंजाब की भी खराब हुई हवा

हरियाणा में कई स्थानों पर दिवाली की रात वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ‘खराब’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। पंजाब के साथ-साथ चंडीगढ़ में भी कई स्थानों पर एक्यूआई ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के समीर ऐप द्वारा घंटे के आधार पर जारी राष्ट्रीय एक्यूआई के मुताबिक बृहस्पतिवार रात 11 बजे हरियाणा के गुरुग्राम में एक्यूआई 322, जींद में 336 और चरखी दादरी में 306 दर्ज किया गया। इसके अलावा हरियाणा के अंबाला में 201, बहादुरगढ़ में 292, भिवानी में 278, बल्लभगढ़ में 211, फरीदाबाद में 245, कुरुक्षेत्र में 270, पंचकूला में 202, रोहतक में 222 और सोनीपत में एक्यूआई 258 दर्ज किया गया।

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Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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