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Delhi: देशभर में लागू होगा ‘वन AIIMS, वन कार्ड’, इलाज और भुगतान होगा और आसान

दिल्ली के एम्स द्वारा शुरू की गई 'वन एम्स वन कार्ड' योजना अब पूरे देश में लागू होने की संभावना है, जिससे मरीज दिल्ली एम्स के स्मार्ट कार्ड का उपयोग करके कहीं भी भुगतान कर सकेंगे। इस पहल से कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा और मरीजों को अधिक सुविधा प्राप्त होगी। यह कार्ड यूएचआईडी और आभा नंबर से जुड़ा हुआ है, जिससे ऑनलाइन टॉप-अप की सुविधा भी उपलब्ध होगी। एम्स प्रशासन इस योजना को सफल बनाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।

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दिल्ली एम्स की योजना देशभर में हो सकती है लागू (तस्वीर साभार | PTI)

Photo : PTI

Delhi News: दिल्ली एम्स की शुरू की गई ‘वन एम्स, वन कार्ड’ पहल अब देशभर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (AIIMS) में लागू किए जाने की तैयारी में है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इस स्मार्ट कार्ड की मदद से मरीज देश के किसी भी एम्स में जांच और इलाज का शुल्क कैशलेस और डिजिटल तरीके से चुका सकेंगे। इससे इलाज कराने वालों को न सिर्फ भुगतान में पारदर्शिता और सुविधा मिलेगी, बल्कि नकद लेकर अस्पताल पहुंचने की अनिवार्यता भी खत्म हो सकेगी।

पूरे देश के एम्स में होगा लागू

दिल्ली एम्स ने यह स्मार्ट कार्ड प्रणाली फरवरी 2024 में लॉन्च की थी, जिसे पहले कर्मचारियों के बीच इसका ट्रायल किया गया और फिर मरीजों के लिए मातृ एवं शिशु ब्लॉक में लागू किया गया। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से एम्स के मुख्य अस्पताल सहित अन्य सभी केंद्रों में विस्तार देने की योजना थी, जो अब पूरे देश के एम्स में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

क्या है स्मार्ट कार्ड?

यह कार्ड मरीज के UHID (Unique Health ID) और आभा नंबर (Ayushman Bharat Health Account) से जुड़ा होता है। मरीज इसमें पैसा टॉप-अप कर सुरक्षित रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इसे ऑनलाइन रीचार्ज किया जा सकता है, जिससे दूरदराज के मरीजों को भी भुगतान करने में सुविधा होगी। यह सुविधा खासतौर पर उन मरीजों के लिए फायदेमंद है जिनके पास डेबिट या क्रेडिट कार्ड नहीं हैं।

नकदी के विकल्प और सुरक्षा कारण

दिल्ली एम्स में प्रतिदिन 15,000 से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं और लगभग 1000–1200 मरीज भर्ती किए जाते हैं, जिनमें से करीब 40% मरीज अन्य राज्यों से होते हैं। इन मरीजों को इलाज के दौरान नकद राशि लेकर आना पड़ता है, जिससे सुरक्षा और भुगतान की पारदर्शिता में समस्या आती है। स्मार्ट कार्ड का उद्देश्य नकद लेनदेन को कम कर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है। हालांकि, अब तक यूपीआई, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण स्मार्ट कार्ड का उपयोग सीमित ही रहा है। लेकिन एम्स प्रशासन अब इसे फिर से सक्रिय और लोकप्रिय बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

एम्स का लक्ष्य

एम्स के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में ओपीडी और इनडोर सेंटरों में मरीजों को यह स्मार्ट कार्ड दिया जाएगा ताकि वे अपने इलाज और दवाओं का भुगतान इसी के माध्यम से करें। ‘वन एम्स, वन कार्ड’ की सोच के पीछे यह विचार है कि मरीज एक ही कार्ड के जरिए देश के किसी भी एम्स में इलाज करवा सकें और कई अस्पतालों में पंजीकरण और भुगतान की झंझट से बच सकें।

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Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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