दिल्ली

7 बजे चाय-नाश्ता और 11 बजे लंच, 3 लोगों से 30 मिनट मुलाकात, जानें केजरीवाल का तिहाड़ शेड्यूल

दिल्ली शराब नीति मामले (Delhi Liquor Policy Case) में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) तिहाड़ जेल में बंद हैं। तिहाड़ जेल में उनका पूरा शेड्यूल क्या होगा? उन्हें कब और क्या-क्या मिलेगा, इस बारे में पूरी जानकारी यहां है -

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अरविंद केजरीवाल तिहाड़ जेल में

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को पहले ED ने दिल्ली शराब नीति मामले (Delhi Liquor Policy Case) में PMLA के तहत गिरफ्तार किया। अब कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत पर दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। तिहाड़ जेल को देश की अत्याधुनिक और सबसे सुरक्षित जेलों में से एक माना जाता है। इस जेल में पहले से ही उनके कैबिनेट में साथी रहे मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia), सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) और AAP सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) भी बंद हैं। चलिए जानते हैं तिहाड़ जेल में बंद अरविंद केजरीवाल को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी? कब उन्हें चाय-नाश्ता और डिनर मिलेगा। इसके अलावा वह किस-किस से व कितनी देर मुलाकात कर सकते हैं -

जेल में केजरीवाल को क्या मिलेगा?

तिहाड़ जेल की सेल में हर कैदी को बिछाने और ओढ़ने के लिए दो कंबल दिए जाते हैं। सीमेंट का चबूतरा ही कैदी का बेड होता है। सेल में टीवी लगा होता है, जिसमें दूरदर्शन के समाचार, स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट चैनल आते हैं। कैदी के विशेष अनुरोध पर सेल में न्यूज पेपर भी उपलब्ध करवाया जाता है। हालांकि, आमतौर पर चेल की लाइब्रेरी में किताबों के अलावा प्रमुख अखबार और मैग्जीन मौजूद होती हैं। यहां से बंदी या कैदी इजाजत लेकर किताब अपनी सेल में लेकर जा सकते हैं। सेल के अंदर ही टॉयलेट भी बना होता है। एक सेल में कम से कम एक और ज्यादा से ज्यादा 5 कैदी ही रह सकते हैं।

सुबह की चाय और नाश्ता

सुबह की चाय का समय 7 बजे निर्धारित है। जेल की नियमावली के अनुसार अलग-अलग दिन के लिए नाश्ता भी अलग-अलग तय है। यदि किसी कैदी या बंदी को डॉक्टर की सलाह के अनुसार अलग नाश्ते का सुझाव है तो उसका प्रबंध किया जाता है। अन्यथा चाय के कुछ देर बाद दलिया, ब्रेड आलू, खिचड़ी, आलू-पूड़ी जैसे नाश्ते में से कोई एक चीज खाने को दी जाती है।

लंच टाइम

लंच के लिए टाइम 11 बजे तय है। लंच में दाल, मौसम के हिसाब से सब्जी या आलू की सब्जी, रोटी या चावल (कैदी/बंदी की इच्छानुसार) खाने को दिया जाता है। शाम साढ़े तीन बजे चाय और स्नैक्स भी कैदियों को परोसा जाता है।

डिनर में क्या

डिनर का समय गर्मियों में साम 7 बजे और सर्दियों में शाम 6.30 बजे होता है। डिनर में दाल, सब्जी के साथ रोटी या चावल खाने को दिए जाते हैं। हालांकि, इस बात का ध्यान रखा जाता है कि दिन में जो दाल और सब्जी दी गई थी, वही रात में भी न दी जाए।

10 लोगों से मुलाकात

तिहाड़ जेल में कैदी या बंदी ज्यादा से ज्यादा 10 लोगों के नाम दे सकता है, जिनसे वह मुलाकात कर सकता है। नियम यह है कि इन 10 में से एक बार में ज्यादा से ज्यादा 3 लोगों से ही मुलाकात कर सकता है और यह मुलाकात भी अधिकतम 30 मिनट की ही होगी। इस तरह से वह हफ्ते में 2 बार लोगों से मिल सकता है। यही नहीं बंदी या कैदी को हफ्ते में दो बार 30-30 मिनट के लिए अपने वकीलों से मिलने की इजाजत होती है।

दिल्ली शराब नीति मामले में जेल में बंद नेता

नामजेल संख्या
अरविंद केजरीवाल2
मनीष सिसोदिया1
संजय सिंह5
के. कविता (BRS)6

इस तरह होती है मुलाकात

कैदी या बंदी से मुलाकात के लिए एक कमरा बना होता है, जिसे जंगला कहा जाता है। इस जंगले के बीच में कांच की दीवार होती है। इसके एक ओर कैदी और दूसरी ओर मुलाकाती खड़े होते हैं। दोनों तरफ माइक लगे होते हैं, जिससे वह आपस में बात कर सकते हैं। यदि मुलाकात कैदी को कुछ देना चाहता है तो उसके लिए उसे जेल प्रशासन से पहले इजाजत लेनी जरूरी है। इसी तरह अगर कैदी के सिग्नेचर लेनेहैं तो वह वकील ले सकता है, लेकिन यह सिग्नेचर तब तक मान्य नहीं होते, जब तक जेल अधीक्षक उन्हें प्रमाणित नहीं कर देता।

नोट - यह सभी जानकारी जेल मैनुअल के अनुसार है। इसमें यह दावा नहीं किया जा सकता कि अरविंद केजरीवाल को भी यही सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं मिल रही हैं।

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Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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