दिल्ली

आत्महत्या रोकने की दिशा में AIIMS की पहल, AI बेस्ड एप्प बचाएगा छात्रों की जान

देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान AIIMS दिल्ली ने आत्महत्या जैसी गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या से लड़ने के लिए एक AI आधारित ऐप 'नेवर अलोन' लॉन्च किया है।

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आत्महत्या रोकने की दिशा में AIIMS की पहल

नई दिल्ली: देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान AIIMS दिल्ली ने आत्महत्या जैसी गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या से लड़ने के लिए एक AI आधारित ऐप 'नेवर अलोन' लॉन्च किया है। यह ऐप विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के मौके पर लॉन्च किया गया है। इसका मकसद है, छात्रों में आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकना, जागरूकता बढ़ाना और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना।

AIIMS के अनुसार, 70-80% मानसिक रूप से पीड़ित लोग इलाज नहीं करवाते, मुख्य कारण है – अवधारणा (awareness) की कमी और कलंक (stigma) का डर।

क्यों है Never Alone ऐप जरूरी

  • भारत में हर दिन 470 से ज़्यादा लोग आत्महत्या करते हैं।
  • 2022 में 1,70,000 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की, जो अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है।
  • 18 से 30 साल के युवाओं में सबसे ज़्यादा आत्महत्या के मामले देखे गए।

क्या है Never Alone ऐप?

  • यह एक AI आधारित सुरक्षित और निजी (private) वेब ऐप है, जिसे WhatsApp के ज़रिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इसमें छात्र 24x7 मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से ऑनलाइन या ऑफलाइन परामर्श ले सकते हैं।
  • स्क्रीनिंग से लेकर काउंसलिंग और फॉलो-अप तक की संपूर्ण सेवा इसमें शामिल है।
  • इसकी कीमत सिर्फ 70 पैसे प्रति छात्र प्रति दिन है।

AIIMS दिल्ली, AIIMS भुवनेश्वर, और IHBAS शाहदरा में एक साथ इस पहल की शुरुआत हुई है। इस प्रोजेक्ट को AIIMS दिल्ली के साथ मिलकर Global Centre of Integrative Health (GCIH) चला रहा है, जो एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है। इसे मार्गदर्शन दे रहे हैं प्रसिद्ध AIIMS एलुमनस और वर्ल्ड फेमस हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. दीपक चोपड़ा। डॉ. नंद कुमार (प्रोफेसर, मानसिक रोग विभाग, AIIMS) कहते हैं कि जब हमारे मेडिकल कॉलेजों में ही मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर मौजूद हैं, फिर भी छात्रों की आत्महत्या होती है, तो ये साफ है कि सिर्फ डॉक्टर नहीं, जागरूकता भी ज़रूरी है। सिर्फ बीमारी नहीं, समाज को भी ठीक करने की ज़रूरत है।

उम्मीद की किरण है एप्प

अगर आप किसी कॉलेज, यूनिवर्सिटी या संस्थान से हैं और अपने छात्रों को यह सेवा देना चाहते हैं, तो आप AIIMS दिल्ली से संपर्क करके इस ऐप को सब्सक्राइब कर सकते हैं। कभी-कभी एक छोटी सी बात, एक छोटा सहारा… एक जान बचा सकता है।कोई अकेला न रहे — यही है 'Never Alone' का संदेश।" यह सिर्फ एक ऐप नहीं, यह उम्मीद की एक नई किरण है।हर छात्र की जिंदगी अनमोल है और इस तकनीकी युग में, AIIMS ने यह साबित कर दिया है कि विज्ञान और संवेदना मिलकर कर सकते हैं चमत्कार।

हर 45 सेकेंड में जाती है एक जान

हर 45 सेकंड में एक जान जाती है, ये सच्चाई डराती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल करीब 7.27 लाख लोग आत्महत्या करते हैं, जिनमें से ज़्यादातर गरीब और मध्यम वर्गीय देशों से होते हैं। NCRB के आकड़ो के मुताबिक भारत में ही साल 2022 में रिकॉर्ड 1.70 लाख से ज्यादा लोगों ने अपनी जान ली, जिनमें बड़ी संख्या 18 से 45 साल के युवाओं की थी। मानसिक बीमारी, डिप्रेशन और नशे की लत इसके पीछे बड़े कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी है इलाज न लेना। करीब 70-80% लोग मानसिक समस्या होने के बावजूद इलाज नहीं कराते, क्योंकि उन्हें समाज के तानों और शर्मिंदगी का डर सताता है। डॉक्टरों की मानें तो आत्महत्या रोकी जा सकती है, अगर हम इसे स्वास्थ्य की तरह समझें और इस पर खुलकर बात करें।

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bhawana gupta
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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