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Delhi NCR Pollution : दिल्ली में AQI गंभीर होते ही लगा GRAP-4, कड़े प्रतिबंध लागू; हाइब्रिड’ मोड पर चलेंगी क्लास

Delhi-NCR GRAP-4 : दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए और वायु गुणवत्ता में और गिरावट को रोकने के लिए एनसीआर में तत्काल प्रभाव से मौजूदा ग्रैप-4 लागू करने का निर्णय लिया है। दिल्ली-एनसीआर में छठी से नौवीं और ग्यारहवीं के छात्रों के लिए भी स्कूलों को ‘हाइब्रिड’ मोड (ऑनलाइन और भौतिक) में कक्षाएं संचालित की जाएंगी। जहां तक छात्रों को संभव हो वहां ऑनलाइन उपस्थित होने का विकल्प दिया जाएगा।

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दिल्ली में ग्रैप-4 लागू

Delhi-NCR GRAP-4 : दिल्ली में शनिवार सुबह धुंध की मोटी चादर छाई हुई है और वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के साथ गंभीर श्रेणी के ऊपर पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार दिल्ली में कुल निगरानी स्टेशन में एक्यूआई 450 से अधिक दर्ज किया जा रहा है, जो गंभीर श्रेणी में आता है। वायु गुणवत्ता की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए और वायु गुणवत्ता में और गिरावट को रोकने के लिए एनसीआर में तत्काल प्रभाव से मौजूदा ग्रैप-4 लागू करने का निर्णय लिया है। दिल्ली और सबसे अधिक प्रभावित एनसीआर जिलों में प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों के साथ-साथ उच्च कक्षाओं (छठी से नौवीं और ग्यारहवीं) के छात्रों के लिए भी स्कूलों को ‘हाइब्रिड’ मोड (ऑनलाइन और भौतिक) में कक्षाएं संचालित करने होंगे, जहां तक छात्रों को संभव हो वहां ऑनलाइन उपस्थित होने का विकल्प दिया जाएगा।

एनसीआर में पहले से लागू मौजूदा जीआरएपी के चरण I, II और III के तहत की गई कार्रवाइयों के अतिरिक्त है। सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार एक्यूआई वजीरपुर में सबसे अधिक 445, विवेक विहार में 444, जहांगीरपुरी में 442, आनंद विहार में 439 और अशोक विहार व रोहिणी दोनों जगह 437 दर्ज किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक एक्यूआई नरेला में 432, पटपड़गंज में 431, मुंडका में 430 और बवाना, आईटीओ एवं नेहरू नगर में 429 दर्ज किया गया। सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, चांदनी चौक और पंजाबी बाग में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 423 दर्ज किया गया, जबकि सिरी फोर्ट और सोनिया विहार में यह 424 रहा।

इन चीजों पर लगा प्रतिबंध

ग्रैप के चौथे चरण में दिल्ली-एनसीआर में सबसे सख्त प्रतिबंध लागू किए गए हैं। इस चरण के तहत, आवश्यक वस्तुओं या आवश्यक सेवाओं को ले जाने वाले ट्रकों को छोड़कर, दिल्ली में ट्रकों का प्रवेश प्रतिबंधित होंगी। हालांकि, सीएनजी, एलएनजी, इलेक्ट्रिक और बीएस-6 डीजल ट्रकों को अनुमति होगी। दिल्ली में पंजीकृत डीजल भारी मालवाहक वाहनों (बीएस-4 और उससे नीचे) के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया गया हैं। हालांकि इसमें केवल आवश्यक सेवाओं के लिए ही छूट दी गई है। सभी निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिसमें राजमार्ग, सड़कें, फ्लाईओवर, बिजली पारेषण लाइनें, पाइपलाइनें और दूरसंचार कार्य जैसी रैखिक सार्वजनिक परियोजनाएं भी शामिल हैं, जिन्हें निचले चरणों में अन्यथा अनुमति दी जाती है।

दिल्ली और सबसे अधिक प्रभावित एनसीआर जिलों में प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों के साथ-साथ उच्च कक्षाओं (छठी से नौवीं और ग्यारहवीं) के छात्रों के लिए भी स्कूलों को ‘हाइब्रिड’ मोड (ऑनलाइन और भौतिक) में कक्षाएं संचालित करने होंगे, जहां तक छात्रों को संभव हो वहां ऑनलाइन उपस्थित होने का विकल्प दिया जाएगा। चौथे चरण के तहत, राज्य सरकारों से प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने पर अतिरिक्त आपातकालीन कदम उठाने पर विचार करने के लिए कहा गया है, जैसे कि कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों को बंद करना, गैर-जरूरी व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करना और यहां तक कि वाहनों के लिए सम-विषम नियम लागू करना।

कितना प्रदूषण खराब

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, शून्य से 50 के बीच का एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘अत्यंत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।

ग्रैप सिस्टम क्या है?

हवा की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बनाए गए ग्रेप (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के पहले चरण को लागू कर दिया गया है। लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण निर्माण कार्यों पर रोक और डीजल जनरेटर के उपयोग पर प्रतिबंध जैसे उपाय शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रदूषण का स्तर इसी तरह बना रहा तो जल्द ही ग्रेप के अन्य चरण लागू किये जा सकते हैं। अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि ओजोन और पीएम10 प्रमुख प्रदूषक तत्व रहे हैं। कई दिनों पर इनका स्तर बहुत अधिक दर्ज किया गया, जो दिवाली से प

ग्रैप-1 कब लागू किया जाता है?

ग्रैप-1 को तब लागू किया जाता है, एक्यूआई यानी हवा की गुणवत्ता 200 से 300 के बीच होती है। इस चरण में निर्माण कार्य पर जैसे बिल्डिंग, सड़क या अन्य निर्माण कार्य पर हल्के फुल्के प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

ग्रैप-2 कब लागू होता है?

ग्रैप-2 तब लागू किया जाता है, जब हवा की क्वालिटी (AQI) जब 301 से 401 के बीच दर्ज की जाती है। इसमें ग्रैप-1 के सभी प्रतिबंधों के साथ स्कूलों को बंद करने और शहरों में निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाती है।

ग्रैप-3 कब लागू होता है?

ग्रैप-3 तब लागू किया जाता है, जब हवा की गुणवत्ता (AQI) 401 से 450 के बीच होती है। इस स्तर पर प्रदूषण के पहुंचने पर ग्रैप-2 के प्रतिबंधों के साथ सभी औद्योगिक इकाइयां यानी कारखाने, फैक्ट्रियों को बंद करते हुए सभी प्रकार के निर्माण और विध्वंश कार्यों को रोकते हुए कड़े उपाय लागू किये जाते हैं।

ग्रैप-4 कब लागू होता है?

ग्रैप-4 सबसे खतरनाक या सबसे हाई लेवल के प्रदूषण को टच करना है, जो एक्यूआई 450 से अधिक होने पर लागू किया जाता है। इस स्तर पर प्रदूषण को कम करने के लिए सभी प्रकार के प्रतिबंध एक साथ लगाए जाते हैं, जिसके तहत स्कलूों में ऑनलाइन कक्षाएं लागू होती हैं। इस दौरान अधिकांश कंपनियों में वर्फ फ्रॉम होम जैसी सेवाएं लागू की जाती हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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