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दिल्ली स्वास्थ्य विभाग खरीद घोटाला : CPA के पूर्व हेड विनोद कुमार रंगा गिरफ्तार, 650 करोड़ रु. स्कैम में ACB का बड़ा एक्शन

जांच में सामने आया कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, बेडशीट और लिनेन आइटम, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, ओआरएस, सर्जिकल कंज्यूमेबल्स और दवाइयों की खरीद कथित तौर पर बाजार भाव से काफी अधिक कीमत पर की गई।

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(सांकेतिक फोटो-Istock)

दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने स्वास्थ्य विभाग में कथित खरीद घोटाले की जांच के दौरान बड़ी कार्रवाई करते हुए सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के पूर्व हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर दवाइयों, सर्जिकल सामान और मेडिकल उपकरणों की खरीद में भारी अनियमितताओं का आरोप है।

एंटी करप्शन ब्रांच के प्रमुख और संयुक्त पुलिस आयुक्त विक्रमजीत सिंह ने बताया कि विजिलेंस निदेशालय की शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ सरकारी अधिकारियों और निजी कंपनियों ने मिलकर खरीद प्रक्रिया में हेरफेर की और चुनिंदा सप्लायर्स को फायदा पहुंचाया। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

जांच में सामने आया कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, बेडशीट और लिनेन आइटम, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, ओआरएस, सर्जिकल कंज्यूमेबल्स और दवाइयों की खरीद कथित तौर पर बाजार भाव से काफी अधिक कीमत पर की गई। आरोप है कि टेंडर की शर्तें और तकनीकी मानक इस तरह तैयार किए गए थे कि केवल कुछ चुनिंदा कंपनियों को ही फायदा मिल सके।

अहम फाइलें उपलब्ध नहीं

मामले में एंटी करप्शन ब्रांच ने 2 जून 2026 को एफआईआर संख्या 07/2026 दर्ज की थी। जांच के दौरान पता चला कि खरीद से जुड़ी कई अहम फाइलें उपलब्ध नहीं कराई गईं। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये फाइलें CPA के तत्कालीन हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा के व्यक्तिगत कब्जे में थीं।

पूछताछ के दौरान डॉ. विनोद कुमार रंगा संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जांच एजेंसी का कहना है कि गायब फाइलों की बरामदगी, पूरे षड्यंत्र का खुलासा करने, अन्य लाभार्थियों और सह-आरोपियों की पहचान करने तथा धन के लेन-देन की जांच के लिए उनकी हिरासत जरूरी थी। इसके बाद ACB ने 18 जून को डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार कर लिया।

संयुक्त पुलिस आयुक्त विक्रमजीत सिंह के अनुसार आरोपी को 19 जून को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। मामले में अन्य सरकारी अधिकारियों, निजी व्यक्तियों, सप्लायर्स और लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ACB का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

Mohit Om
मोहित ओमauthor

जनमानस की खबर को पाठकों तक पहुंचाना ही एकमात्र लक्ष्य। एक दशक से ज्यादा पत्रकारिता का अनुभव। अपराध के पीछे की साजिश को बेपर्दा करने वाली हर खबर पर पैनी निगाह रखता हूँ।

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