दिल्ली विधानसभा में पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) की दूसरी रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें राजधानी की आबकारी नीति को लेकर बड़े खुलासे किए गए हैं। यह रिपोर्ट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें 2017-18 से 2020-21 के बीच की आबकारी व्यवस्था और बाद में लागू 2021-22 की नई नीति दोनों की समीक्षा की गई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नीतिगत खामियों,निर्णयों में पारदर्शिता की कमी और नियमों की अनदेखी के चलते सरकार को ₹2000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। PAC ने खास तौर पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के कुछ फैसलों पर सवाल उठाए हैं।
लाइसेंसिंग और कीमत निर्धारण में गड़बड़ी
रिपोर्ट के अनुसार,आबकारी नीति के तहत लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। कुछ थोक और खुदरा विक्रेताओं को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। भारत में निर्मित विदेशी शराब की कीमत तय करने में भी पारदर्शिता की कमी पाई गई। आरोप है कि कीमत निर्धारण में मनमानी हुई, जिससे बाजार प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और राजस्व पर असर पड़ा।
फैसलों पर सवाल,नियमों की अनदेखी
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कई महत्वपूर्ण निर्णय बिना सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के लिए गए। इनमें लाइसेंस फीस में छूट देना, समय पर शुल्क न चुकाने वालों पर कार्रवाई में ढील और एयरपोर्ट जोन में Earnest Money Deposit(EMD) वापस करना शामिल है। इसके अलावा, विशेषज्ञ समिति (Committee of Experts) की सिफारिशों से हटकर फैसले लिए गए, जिससे नीति की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।टेंडर प्रक्रिया और कंपनियों के संबंध
रिपोर्ट में 2021-22 की आबकारी नीति के तहत टेंडर प्रक्रिया में भी अनियमितताओं का जिक्र है। कुल 22 शिकायतें सामने आईं, जिनमें से 9 बोलीदाता अयोग्य पाए गए। बावजूद इसके, कई मामलों में उचित जांच के बिना 17 खुदरा ज़ोन आवंटित कर दिए गए।
इसके साथ ही Indospirit और KhaoGali Restaurants Pvt. Ltd. के बीच कारोबारी संबंधों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, KhaoGali ने अपने शराब स्टॉक का 45.26% हिस्सा Indospirit से खरीदा, जिससे थोक और खुदरा विक्रेताओं के बीच वर्टिकल इंटीग्रेशन के संकेत मिले।
पुरानी नीति में भी खामियां
पीएसी ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ नई आबकारी नीति ही नहीं, बल्कि 2017 से 2021 तक लागू पुरानी नीति में भी गंभीर कमियां थीं। इनमें नियमों का उल्लंघन कर लाइसेंस देना, गुणवत्ता नियंत्रण में कमी, टेस्ट रिपोर्ट का अभाव और प्रवर्तन एजेंसियों की निष्क्रियता शामिल है। Excise Intelligence Bureau (EIB) और प्रवर्तन शाखा राजस्व नुकसान रोकने और तस्करी पर नियंत्रण में प्रभावी नहीं रही।
तकनीकी सिस्टम भी फेल
शराब की सप्लाई और ट्रैकिंग के लिए बनाई गई ESCIMS (Excise Supply Chain Information Management System) प्रणाली को भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सका। इससे निगरानी और पारदर्शिता दोनों प्रभावित हुईं।
एक साल में वापस लेनी पड़ी नीति
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2021-22 की नई आबकारी नीति को लागू करने के एक साल के भीतर ही 31 अगस्त 2022 को वापस लेना पड़ा। यह इस बात का संकेत है कि नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों स्तर पर गंभीर खामियां थीं।
जांच एजेंसियों और अदालत में मामला लंबित
पीएसी ने साफ किया है कि यह रिपोर्ट कैग के निष्कर्षों और विभागीय जवाबों पर आधारित है। फिलहाल यह मामला जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी और अदालतों में विचाराधीन है। समिति ने कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय विधानसभा पर छोड़ दिया है।
