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Delhi AQI Today: दिल्ली में सुबह ही घुटने लगा दम, AQI 400 पार, 20 इलाकों में हालात गंभीर

Delhi AQI Today: दिल्ली में 7 नवंबर शनिवार सुबह औसतन AQI 365 दर्ज किया गया, जबकि IIT दिल्ली में 440 तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पराली और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।

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दिल्ली में AQI गंभीर श्रेणी में (फाइल फोटो)

Photo : PTI

Delhi AQI Today: देश की राजधानी दिल्ली में सांसों पर संकट लगातार बरकरार है। शनिवार, 7 नवंबर 2026 की सुबह 7 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 365 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' (Very Poor) श्रेणी में आता है। हालांकि, शुक्रवार को दिन का औसतन AQI 382 रहा था, जिससे आंकड़ों में मामूली सुधार जरूर दिख रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे दिन चढ़ेगा और सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही बढ़ेगी, हवा और अधिक जहरीली हो सकती है।

IIT दिल्ली में AQI 440 पार

राजधानी के 59 मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। दिल्ली के कई प्रमुख रिहायशी और शैक्षणिक इलाकों में प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में पहुंच गया है। सबसे प्रदूषित इलाका IIT दिल्ली रहा, यहां शनिवार सुबह हवा सबसे खराब दर्ज की गई, जहां AQI 440 तक पहुंच गया।

गंभीर श्रेणी वाले अन्य प्रमुख इलाके

  • पंजाबी बाग: 433
  • विवेक विहार: 425
  • जहांगीरपुरी और मुंडका: 421
  • रोहिणी: 418
  • आरके पुरम: 414
  • नजफगढ़ और सोनिया विहार: 412
  • सिरीफोर्ट: 411
  • बवाना, डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज और द्वारका सेक्टर-8: 410
  • नरेला, DTU और नॉर्थ कैंपस DU: 409
  • पूसा: 405
  • अलीपुर, ITO, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम और पटपड़गंज: 401 से 402

"सिर्फ नियमों से नहीं सुधरेगी हवा": सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

इससे एक दिन पहले, शुक्रवार 6 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण पर अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि सिर्फ कागजी पाबंदियों से स्थिति नहीं बदलेगी। बेंच ने कहा कि कोई भी पाबंदी अकेले काम नहीं करेगी। हम जितने ज्यादा आदेश जारी करेंगे, नियमों के उल्लंघन के मामले उतने ही बढ़ते जाएंगे। जब तक लोगों के व्यवहार में बदलाव नहीं आएगा, तब तक सड़कों पर गाड़ियों की बेतहाशा भीड़ और धुआं प्रदूषण का मुख्य कारण बना रहेगा।

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को सूचित किया कि दिल्ली के कुल प्रदूषण में इस समय पराली जलाने की हिस्सेदारी 14% रही है, और धूल, औद्योगिक कचरे व निर्माण कार्यों पर कड़े नियम लागू किए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को तय की गई है।

मनीष तिवारी का सरकार पर हमला

दिल्ली की जहरीली हवा पर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। शनिवार सुबह कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट कर केंद्र और दिल्ली सरकार की जवाबदेही पर सीधे सवाल उठाए। मनीष तिवारी ने लिखा कि दिल्ली की खराब हवा के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? निश्चित रूप से पंजाब के किसान नहीं, जिन्हें हर बार सबसे आसान निशाना बना दिया जाता है। अक्टूबर 2026 के अंत तक धान की 85% कटाई पूरी हो चुकी थी। अब समय आ गया है कि भारत सरकार और दिल्ली सरकार इसकी सीधी जिम्मेदारी लें। पिछले एक दशक से हर साल नवंबर-दिसंबर में दिल्ली जिस गंभीर वायु प्रदूषण संकट का सामना कर रही है, वह शायद देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। एक तरफ जहां प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर बैठकों और सुनवाइयों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली-एनसीआर के आम नागरिक लगातार जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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