Delhi AQI Today: देश की राजधानी दिल्ली में सांसों पर संकट लगातार बरकरार है। शनिवार, 7 नवंबर 2026 की सुबह 7 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 365 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' (Very Poor) श्रेणी में आता है। हालांकि, शुक्रवार को दिन का औसतन AQI 382 रहा था, जिससे आंकड़ों में मामूली सुधार जरूर दिख रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे दिन चढ़ेगा और सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही बढ़ेगी, हवा और अधिक जहरीली हो सकती है।
IIT दिल्ली में AQI 440 पार
राजधानी के 59 मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। दिल्ली के कई प्रमुख रिहायशी और शैक्षणिक इलाकों में प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में पहुंच गया है। सबसे प्रदूषित इलाका IIT दिल्ली रहा, यहां शनिवार सुबह हवा सबसे खराब दर्ज की गई, जहां AQI 440 तक पहुंच गया।
गंभीर श्रेणी वाले अन्य प्रमुख इलाके
- पंजाबी बाग: 433
- विवेक विहार: 425
- जहांगीरपुरी और मुंडका: 421
- रोहिणी: 418
- आरके पुरम: 414
- नजफगढ़ और सोनिया विहार: 412
- सिरीफोर्ट: 411
- बवाना, डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज और द्वारका सेक्टर-8: 410
- नरेला, DTU और नॉर्थ कैंपस DU: 409
- पूसा: 405
- अलीपुर, ITO, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम और पटपड़गंज: 401 से 402
"सिर्फ नियमों से नहीं सुधरेगी हवा": सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
इससे एक दिन पहले, शुक्रवार 6 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण पर अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि सिर्फ कागजी पाबंदियों से स्थिति नहीं बदलेगी। बेंच ने कहा कि कोई भी पाबंदी अकेले काम नहीं करेगी। हम जितने ज्यादा आदेश जारी करेंगे, नियमों के उल्लंघन के मामले उतने ही बढ़ते जाएंगे। जब तक लोगों के व्यवहार में बदलाव नहीं आएगा, तब तक सड़कों पर गाड़ियों की बेतहाशा भीड़ और धुआं प्रदूषण का मुख्य कारण बना रहेगा।
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को सूचित किया कि दिल्ली के कुल प्रदूषण में इस समय पराली जलाने की हिस्सेदारी 14% रही है, और धूल, औद्योगिक कचरे व निर्माण कार्यों पर कड़े नियम लागू किए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को तय की गई है।
मनीष तिवारी का सरकार पर हमला
दिल्ली की जहरीली हवा पर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। शनिवार सुबह कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट कर केंद्र और दिल्ली सरकार की जवाबदेही पर सीधे सवाल उठाए। मनीष तिवारी ने लिखा कि दिल्ली की खराब हवा के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? निश्चित रूप से पंजाब के किसान नहीं, जिन्हें हर बार सबसे आसान निशाना बना दिया जाता है। अक्टूबर 2026 के अंत तक धान की 85% कटाई पूरी हो चुकी थी। अब समय आ गया है कि भारत सरकार और दिल्ली सरकार इसकी सीधी जिम्मेदारी लें। पिछले एक दशक से हर साल नवंबर-दिसंबर में दिल्ली जिस गंभीर वायु प्रदूषण संकट का सामना कर रही है, वह शायद देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। एक तरफ जहां प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर बैठकों और सुनवाइयों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली-एनसीआर के आम नागरिक लगातार जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
