Delhi News: दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने सोनिया विहार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के आसपास अवैध रूप से बने पांच वाटर स्पोर्ट्स क्लबों को खाली करने के लिए बेदखली नोटिस जारी किए हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी क्लब डीडीए की भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए हैं। क्लब से जुड़े सदस्यों ने मंगलवार को जानकारी दी कि प्राधिकरण ने निर्धारित समय सीमा में जमीन खाली न करने पर बलपूर्वक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
'दिल्ली रोइंग एसोसिएशन' करती है क्लबों का प्रतिनिधित्व
'दिल्ली रोइंग एसोसिएशन' इन पांचों क्लबों का प्रतिनिधित्व करती है, जिनमें वसुंधरा रोइंग क्लब, बीएसएफ सेंटर वाटर स्पोर्ट्स क्लब, सोनिया विहार वाटर स्पोर्ट्स क्लब, वजीराबाद वाटर स्पोर्ट्स क्लब और दिल्ली रोइंग नोड शामिल हैं। एसोसिएशन का कहना है कि वह रोइंग फेडरेशन ऑफ इंडिया और दिल्ली ओलंपिक एसोसिएशन से संबद्ध है। डीडीए द्वारा 21 मई को जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सोनिया विहार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के प्रवेश द्वार के पास स्थित यह भूमि प्राधिकरण की संपत्ति है, जिस पर अस्थायी ढांचे बनाकर अतिक्रमण किया गया है। डीडीए ने क्लब संचालकों को नोटिस जारी होने के तीन दिन के अंदर यह अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। हालांकि मंगलवार तक इस मामले में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी।
सैकड़ों युवा खिलाड़ी होंगे प्रभावित
रोइंग एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि डीडीए ने पिछले सप्ताह इन पांचों क्लबों के परिसरों के बाहर नोटिस चस्पा किए थे। ये क्लब सोनिया विहार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास स्थित हैं, जहां रोइंग के साथ-साथ कयाकिंग और कैनोइंग जैसी जल क्रीड़ा गतिविधियां कराई जाती हैं। डीडीए ने नोटिस में तय समयसीमा के भीतर जमीन खाली न करने पर बल प्रयोग की चेतावनी भी दी है। वहीं, एसोसिएशन का यह भी आरोप है कि डीडीए ने दो क्लबों की बिजली आपूर्ति काट दी है। दिल्ली रोइंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जय करण चौधरी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले ये ही प्रमुख रोइंग और वाटर स्पोर्ट्स केंद्र हैं। उनके अनुसार, फिलहाल खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए इस स्तर की कोई वैकल्पिक सुविधा मौजूद नहीं है। ऐसे में इन क्लबों के बंद होने से सैकड़ों युवा खिलाड़ी प्रभावित होंगे और कई आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी अपने खेल करियर को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे।
एसोसिएशन ने इसे बेहद निराशाजनक और विरोधाभासी कदम बताया है। उनका कहना है कि जब केंद्र सरकार 'खेलो इंडिया' जैसी योजनाओं के जरिए खेलों को बढ़ावा देने और ओलंपिक में पदक बढ़ाने पर जोर दे रही है, ऐसे में जमीनी स्तर के खेल ढांचे को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।
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