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'अगर प्रधानमंत्री युद्ध रुकवा सकते हैं, तो पेपर लीक क्यों नहीं?' , दिल्ली के बाद महाराष्ट्र में CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने पूछा तीखा सवाल

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई गंभीर मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बेरोजगारी को लेकर सरकार पर तीखा सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP प्रमुख अभिजीत दीपके

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

CJP Abhijeet Dipke: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने आज एक प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि वे अभी 1-2 दिन के लिए घर आए हैं और आगे का फैसला बाद में लेंगे। वे शुरू से मांग कर रहे हैं कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उनका कहना है कि अगर शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय नहीं होती, तो यह प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है। अगर वे रूस और यूक्रेन का युद्ध रुकवा सकते हैं, तो पेपर लीक क्यों नहीं रोक सकते?

राजनीतिक दलों और सरकार से कोई उम्मीद नहीं

सुप्रीम कोर्ट में 'कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल होने के बाद देश के युवाओं ने खुद को इससे जोड़कर आंदोलन को भारी समर्थन दिया। अभिजीत का कहना है कि वे आगे चलकर शहरी, ग्रामीण, किसान और मजदूर, हर वर्ग के युवाओं के मुद्दों को उठाएंगे। युवाओं को अब मौजूदा राजनीतिक दलों और सरकार से कोई उम्मीद नहीं बची है। वे उन सभी लोगों से संवाद करेंगे जिन्होंने उनकी सदस्यता ली है और उनके सुझावों के आधार पर आगे का रास्ता तय करेंगे।

'पाकिस्तानी' कहे जाने वाले आरोपों पर पलटवार

विरोधियों द्वारा उन पर बांग्लादेश, पाकिस्तान और विदेशी अजेंडा चलाने के आरोपों पर उन्होंने कड़ा जवाब दिया। वे कहते हैं, "मैं आज भारत में आपके सामने बैठा हूं और कल मैंने दिल्ली में प्रदर्शन किया था। क्या सरकार एक पाकिस्तानी को दिल्ली में प्रदर्शन करने देगी?" उन्होंने सीबीएसई के 17 वर्षीय छात्र वेदांत का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उस बच्चे ने अपनी मार्कशीट के गलत मूल्यांकन के खिलाफ आवाज उठाई, तो मीडिया और सरकार ने उसे भी 'पाकिस्तानी' कह दिया। वे सवाल करते हैं कि इस देश में आप किस-किस को पाकिस्तानी कहेंगे? क्या सिर्फ भाजपा और आईटी सेल वाले ही भारतीय हैं और बाकी सब पाकिस्तानी?

" यह दबाव नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है"

आंदोलन के बढ़ते प्रभाव और दबाव के बारे में बात करते हुए वे कहते हैं कि यह दबाव नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें सोनम वांगचुक, विश्वंभर चौधरी और अंजलि दमानिया जैसे विचारकों का समर्थन मिला है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और संजय हेगड़े भी उनके साथ जुड़ रहे हैं। कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों से सीधे संपर्क के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी तक कोई संपर्क नहीं हुआ है, लेकिन जो भी युवाओं के मुद्दों पर साथ आना चाहता है, उसका स्वागत है। अपनी पूर्व पार्टी 'आप' (AAP) के बारे में भी उन्होंने यही कहा कि वे किसी एक दल के लिए नहीं बल्कि देश के युवाओं के लिए लड़ रहे हैं।

देश में बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था का संकट

अभिजीत दीपके देश के गंभीर आंकड़ों को सामने रखते हुए कहते हैं कि हमारी शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ढह चुकी है और देश में पिछले 40 सालों में सबसे गंभीर बेरोजगारी है। देश में हर साल 50 लाख ग्रेजुएट्स निकलते हैं, जिनमें से केवल 20 लाख को नौकरी मिलती है और 30 लाख युवा बेरोजगार रह जाते हैं। इस गंभीर मुद्दे पर वे सभी से समर्थन की अपील करते हैं। आखिर में बदलाव और राजनीतिक आंदोलन के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस देश में हर चीज 'पॉलिटिकल' (राजनैतिक) है। केवल 5 साल में एक बार वोट दे देना ही पॉलिटिक्स नहीं होता है।

atul. Singh
अतुल सिंहauthor

मैं अतुल सिंह,मैं 14 वर्षों से अधिक समय से टीवी पत्रकारिता में विभिन्न क्षेत्रों को खबरों को कवर करने वाला अनुभवी पत्रकार हूं। वर्तमान में Times Now नवभारत के लिए principal correspondent हूं। मैंने इंडिया टीवी, ज़ी न्यूज़,IBN 7 (न्यूज़ 18),Lemon न्यूज़ जैसे प्रमुख मीडिया संगठनों के साथ भी काम किया है। मनोरंजन,नागरिक मुद्दे ,इंफ्रा,राजनीति,आम और विधानसभा चुनाव और अपराध जैसे विषयों को बखूबी कवर किया है। वर्तमान में मुम्बई ब्यूरो से जुड़ा हुआ हूं। कई राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े कई विशेष खबरें भी कवर किया है।

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