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छत्तीसगढ़ में आसमान का रंग हुआ गहरा लाल, साइक्लोन अर्नब से क्या है इसका संबंध?

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और किरंदुल में आसमान के गहरे लाल रंग के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। लोग इसे साइक्लोन अर्नब से जोड़ रहे हैं, लेकिन मौसम विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और किरंदुल इलाके में आसमान के गहरे लाल रंग के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। आसमान का बदला हुआ रंग देखकर लोग हैरान हैं। कुछ लोग इसे साइक्लोन अर्नब से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, मौसम विभाग ने अब तक आसमान के लाल होने और चक्रवात के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है। दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों में भी चक्रवात के दौरान या उससे पहले आसमान का रंग बदलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

क्यों लाल दिखाई दे रहा है आसमान?

'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि चक्रवात के दौरान चलने वाली तेज हवाएं धूल, रेत और आयरन युक्त लाल मिट्टी के कणों को वायुमंडल में काफी ऊंचाई तक पहुंचा सकती हैं। वातावरण में मौजूद इन कणों की वजह से आसमान का रंग असामान्य रूप से लाल दिखाई दे सकता है।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और किरंदुल में भी आसमान के लाल दिखने के पीछे ऐसी ही कोई वजह हो सकती है। हालांकि, इस मामले में इसकी पुष्टि करने वाले वैज्ञानिक प्रमाण सामने आना जरूरी है। फिलहाल, वायरल वीडियो और चक्रवात के बीच संबंध को स्थापित नहीं माना जा सकता।

ऑस्ट्रेलिया में भी दिख चुका है ऐसा नजारा

इस साल मई में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में साइक्लोन नरेल के दौरान भी आसमान का रंग बदलने की घटना सामने आई थी। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों की मिट्टी में आयरन की मात्रा अधिक है। ऐसी मिट्टी के कण हवा में फैलने पर उनका रंग और वायुमंडलीय परिस्थितियां आसमान के लाल दिखाई देने की वजह बन सकती हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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