चंडीगढ़ को पार्कों का शहर कहा जाता है। इसकी वजह है कि यहां के हर एक शहर के, हर एक सेक्टर में पार्क बने हुए हैं। इतना ही नहीं चंडीगढ़ की शुरुआत भी एक पार्क से हुई है। यहां के सेक्टर-9 में एक पार्क बना हुआ है, जहां पर सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ का फाउंडेशन स्टोन भी मौजूद है। देश की आजादी के बाद इसे चंडीगढ़ के तौर पर निर्माण करने का सपना पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने देखा था।
जिसके बाद साल 1952 में इस सपने को सच करने के लि शहर में नींव का पत्थर रख दिया गया। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस शहर को बसाया और भूमि के बड़े टुकड़े पर सबकुछ नया निर्मित किया गया। इसलिए इसे पत्थरों का शहर भी कहा जाता है।
22 गांवों में बसा हुआ था चंडीगढ़
आपको बता दें कि देश की आजादी के समय अमृतसर से लेकर हरियाणा के सिरसा जिले तक की सारी जगह पंजाब में आती थी। इतना ही नहीं हिमाचल का वर्तमान जिला शिमला, किन्नौर और सिरमौर, मंडी, कांगड़ा दो अलग- अलग रियासत में आते थे। देश की आजादी के वक्त चंडीगढ़ 22 गांवों में बसा हुआ था, जिसे विभाजित कर दो से तीन राज्य बनाने की प्लानिंग थी।
ली कार्बुजिए ने डिजान किया शहर
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अप्रैल 1952 में शहर का नींव पत्थर रखा, जिसेक बाद इस शहर को बसाने की जिम्मेदारी आर्किटेक्ट ली कार्बुजिए को दी गई थी। प्लानिंग के तहत घरों से लेकर दफ्तरों की डिजाइनिंग ऐसी होनी थी कि दिन में रोशनी के लिए बल्ब की जरूरत न पड़े। हर मौसम में गर्मी और सर्दी के लिए अतिरिक्त उपकरणों की जरूरत न हो और शहर में बनने वाले घर दो मंजिल से ज्यादा के न बनाए जाएं।
