चण्डीगढ़

13 दिन ICU में, फिर भी नहीं टूटा कनिष्का का सपना, ऑक्सीजन सपोर्ट पर देने पहुंच गई 12वीं की परीक्षा

चंडीगढ़ के मनीमाजरा में जब एंबुलेंस में बैठकर 12वीं की छात्रा कनिष्का बिष्ट एग्जाम सेंटर पहुंची तो हर कोई हैरान रह गया। कनिष्का के जज्बे को सलाम करने लगा। कनिष्का पिछले 13 दिनों से आईसीयू में भर्ती थी, लेकिन जैसे ही परीक्षा का समय आया, सबसे पहले एग्जाम सेंटर पहुंच गई।

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चंडीगढ़ के मनीमाजरा के स्कूल में ऑक्सीजन स्पोर्ट-व्हीरचेयर पर कनिष्का ने दी 12वीं की परीक्षा

चंडीगढ़ के मनीमाजरा में इन दिनों एक नाम हर जुबान पर है-कनिष्का बिष्ट। 17 साल की यह छात्रा केवल 12वीं की परीक्षा देने नहीं पहुंची थी, वह हौसले की ऐसी मिसाल बनकर आई थी, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को हैरान कर दिया। दरअसल कुछ दिन पहले तक कनिष्का अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रही थी। खांसी-जुकाम से शुरू हुई बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया और निमोनिया में बदल गई। हालत इतनी बिगड़ी कि उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। दस दिन तक वह बेहोश रही। परिवार के लिए हर पल चिंता और अनिश्चितता से भरा था। 13 दिन तक आईसीयू में रही इस बेटी के लिए सबसे बड़ा सवाल यही था-क्या वह अपना 12वीं का बोर्ड एग्जाम दे पाएगी?

कनिष्का की जिद

लेकिन जब कनिष्का को होश आया, तो उसकी पहली जिद किताबों और परीक्षा को लेकर थी। उसने अपने पिता से साफ कहा-“मुझे एग्जाम देना है।” यह केवल एक परीक्षा नहीं थी, यह उसके सपनों की परीक्षा थी। बचपन से दिव्यांग रही कनिष्का ने पहले भी कई चुनौतियों का सामना किया था, मगर इस बार लड़ाई जिंदगी और भविष्य दोनों से थी।

अस्पताल से सीधे एक्जाम सेंटर

शुक्रवार को फिजिक्स का पेपर था। अस्पताल से सीधे परीक्षा केंद्र तक का सफर आसान नहीं था। ऑक्सीजन सपोर्ट, व्हीलचेयर और जरूरी मेडिकल उपकरणों के साथ जब वह सेंटर पहुंची, तो हर नजर उसी पर ठहर गई। कमजोर शरीर, लेकिन आंखों में अडिग विश्वास-जैसे वह कह रही हो कि हालात चाहे जितने भी कठिन हों, सपनों की उड़ान को रोका नहीं जा सकता।

साहस से लिख डाली नई कहानी

सेक्टर-26 स्थित खालसा स्कूल की 12वीं नॉन-मेडिकल की छात्रा कनिष्का का एग्जाम सेंटर मनीमाजरा के सरकारी स्कूल में था। परीक्षा कक्ष में बैठी यह बेटी केवल उत्तर-पुस्तिका नहीं भर रही थी, वह अपने साहस से एक नई कहानी लिख रही थी। वहां मौजूद शिक्षक, छात्र और अभिभावक उसकी हिम्मत को देख भावुक हो उठे।

छात्रों के लिए प्रेरणा

कनिष्का की कहानी हमें यह सिखाती है कि कठिनाइयां जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन उनसे हार मान लेना विकल्प नहीं है। ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे बैठी उस छात्रा ने साबित कर दिया कि असली ताकत शरीर में नहीं, मन में होती है। आज कनिष्का केवल एक छात्रा नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक बन गई है। उसने दिखा दिया कि यदि इरादे मजबूत हों, तो आईसीयू से भी सपनों की राह निकल सकती है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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