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Bahraich: कूलर ने तोड़ी शादी, चौखट से बैरंग लौटी बारात; इतनी सी बात पर दुल्हन का पारा हुआ हाई

उत्तर प्रदेश के बलिया में भीषण गर्मी में कूलर के सामने बारातियों का पसीना सुखाना भारी पड़ गया। कूलर के सामने बैठने को लेकर विवाद होने पर दुल्हन ने शादी से इनकार कर दिया, जिससे बारात बैरंग वापस चली गई।

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बहराइच में दुल्हन ने शादी से किया इनकार

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

बलिया: भइया यूपी क्या है अपने आपमें गजब है...यहां बारात में अगर लड़के वालों के रौब को तवज्जो न दिया तो समझो खातिरदारी में कमी रह गई। बाराती अपने ही स्वैग में रहते हैं, उस रात वो खुद को किसी तुर्रम खां से कम नहीं आंकते। कभी-कभार तो लड़की पक्ष सबकुछ सह जाता है, लेकिन कहीं-कहीं दांव उल्टा भी पड़ जाता है। ऐसा ही माजरा देखने को मिला है बहराइच जिले में। जी, हां यहां चितबड़ागांव थाना क्षेत्र में शुक्रवार की रात कूलर के सामने बैठने को लेकर बारातियों के विवाद करने के बाद दुल्हन के शादी से इनकार करने पर बारात बैरंग लौट गई। पुलिस ने बताया कि इस मामले में दूल्हे सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

कूलर के सामने बैठने को लेकर विवाद

पुलिस के अनुसार जिले के चितबड़ागांव थाना क्षेत्र के चितबड़ा गांव में शुक्रवार की रात एक शादी समारोह में कूलर के सामने बैठने को लेकर बारातियों द्वारा विवाद कर लिया गया जिसके बाद दुल्हन प्रतिभा गुप्ता नाराज हो गई और उसने शादी से इनकार दिया, इससे दोनों पक्षों में भारी विवाद हो गया।

थाना प्रभारी प्रशांत चौधरी ने बताया कि दोनों पक्षों के काफी प्रयास के बावजूद दुल्हन शादी करने के लिए तैयार नहीं हुई। पुलिस ने इस मामले में दूल्हा हुकुम चंद जायसवाल, उसके बहनोई पंकज जायसवाल के साथ ही दुल्हन के पिता नन्द जी गुप्ता और उसके भाई राजेश गुप्ता के खिलाफ बीएनएस की धारा 126 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

(इनपुट-भाषा)

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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