Gaya Dulhan News: बिहार के गया जिले के शेरघाटी स्थित एसएमएसजी कॉलेज में उस समय एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जब शादी के तुरंत बाद एक नवविवाहिता दुल्हन मैट्रिक यानी 10वीं की परीक्षा देने परीक्षा केंद्र पहुंची। आमतौर पर शादी के बाद दुल्हन सीधे अपने ससुराल जाती है, लेकिन इस दुल्हन ने पहले अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता दी। सजी-धजी गाड़ी में दूल्हे के साथ परीक्षा केंद्र पहुंची दुल्हन को देखने के लिए वहां मौजूद छात्रों और लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। दूल्हा खुद उसे परीक्षा केंद्र तक छोड़ने आया था।
लोगों के लिए प्रेरणा बना दुल्हन का कदम
हाथ में एडमिट कार्ड लिए और घूंघट ओढ़े दुल्हन परीक्षा हॉल तक गई और निर्धारित समय पर अपनी परीक्षा दी। परीक्षा समाप्त होने के बाद वह अपने पति के साथ ससुराल के लिए रवाना हो गई। इन दिनों मैट्रिक की परीक्षाएं चल रही हैं और बड़ी संख्या में विद्यार्थी परीक्षा देने पहुंच रहे हैं। ऐसे माहौल में दुल्हन का यह कदम लोगों के लिए प्रेरणा बन गया। यह घटना इस बात का संदेश देती है कि जीवन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के बीच भी शिक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी परिस्थिति पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।
20 फरवरी की रात को संपन्न हुई शादी
जानकारी के अनुसार, शेरघाटी की इस छात्रा का विवाह 20 फरवरी की रात को संपन्न हुआ था। परंपरा के तहत 21 फरवरी की सुबह उसकी विदाई होनी थी और ससुराल में विभिन्न रीति-रिवाज निभाए जाने थे। हालांकि, उसी दिन मैट्रिक की विज्ञान विषय की परीक्षा निर्धारित थी, जिसे देना उसके लिए बेहद आवश्यक था। छात्रा ने अपने पति और ससुराल पक्ष को समझाया और परीक्षा के महत्व के बारे में बताया। उनकी सहमति मिलने के बाद उसने तय किया कि विदाई के तुरंत बाद सुबह 8 बजे वह सीधे परीक्षा केंद्र जाएगी। इस तरह उसने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी पढ़ाई को भी प्राथमिकता दी।
दूल्हे ने भी दिया साथ
नवविवाहित दूल्हे ने भी इस पूरे मामले में पूरा साथ निभाया। जब छात्रा परीक्षा कक्ष के भीतर अपना पेपर दे रही थी, तब उसके पति ने बाहर गाड़ी में बैठकर लगभग तीन घंटे तक धैर्यपूर्वक इंतजार किया। परीक्षा खत्म होने के बाद ही दोनों साथ में ससुराल के लिए रवाना हुए। परीक्षा केंद्र पर तैनात अधिकारियों ने भी छात्रा के दृढ़ संकल्प की सराहना की। उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसे समय पर परीक्षा कक्ष तक पहुंचाने में सहयोग किया और उसके जज्बे का सम्मान किया।
