Bihar News: बिहार में सत्ता परिवर्तन और नई सरकार के गठन के साथ ही प्रशासन कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते दिख रहा है। मुख्यमंत्री के 'ब्लॉक से थाने तक सख्ती' बरतने के निर्देश के ठीक बाद, शुक्रवार तड़के राज्य की 15 प्रमुख जेलों में एक साथ छापेमारी की गई। पुलिस और प्रशासन की इस अचानक हुई दस्तक ने न केवल कैदियों बल्कि जेल अधिकारियों की भी नींद उड़ा दी।भोजपुर, दरभंगा, भागलपुर, गया मुजफ्फरपुर, नालंदा, समस्तीपुर, मोतिहारी, औरंगाबाद, वैशाली, सुपौल, मुंगेर, बक्सर, किशनगंज और कटिहार जिले की जेलों में ये कार्रवाई हुई है।
भोर से शुरू हुआ एक्शन
शुक्रवार की अल सुबह बिहार के अलग-अलग जिलों में पुलिस की गाड़ियां जेलों की ओर पहुंचीं। नालंदा में तड़के 4 बजे ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीम बिहारशरीफ मंडल कारा पहुंची। जिलाधिकारी कुंदन कुमार और एसपी भारत सोनी के नेतृत्व में करीब 100 जवानों ने जेल के एक-एक वार्ड, किचन और टॉयलेट तक की सघन तलाशी ली। अचानक हुई इस कार्रवाई से जेल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
मुजफ्फरपुर और मोतिहारी में हाई-प्रोफाइल छापेमारी
मुजफ्फरपुर की शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में भी सुबह 4:30 बजे सन्नाटा टूटा, जब डीएम सुब्रत कुमार सेन और एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ अंदर दाखिल हुए। पुलिस का मुख्य फोकस जेल के भीतर बंद कुख्यात अपराधियों के 'हाई सिक्योरिटी वार्ड' पर था। इसी तरह मोतिहारी सेंट्रल जेल में भी सुबह 5 बजे से करीब दो घंटे तक बैरकों को खंगाला गया। अधिकारियों का उद्देश्य जेल के भीतर से चलने वाले संभावित आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करना था।
रात में समस्तीपुर में छापेमारी
जहां अधिकांश जगहों पर सुबह रेड हुई, वहीं समस्तीपुर में पुलिस ने रात का वक्त चुना। गुरुवार रात करीब 10:15 बजे अचानक 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी मंडल कारा की दीवारें घेर चुके थे। एएसपी संजय पांडे के नेतृत्व में आधी रात तक चली इस छापेमारी के दौरान जेल अधीक्षक, जो किसी और काम से बाहर थे, उन्हें भी भागते हुए वापस आना पड़ा।
औरंगाबाद में भारी सुरक्षा घेरा
औरंगाबाद में भी जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा और पुलिस कप्तान अंबरीष राहुल ने करीब 230 जवानों के साथ मंडल कारा का जायजा लिया। टीम ने पुरुष और महिला वार्डों के साथ-साथ जेल के अस्पताल और रसोईघर की भी बारीकी से जांच की। प्रशासन की इस सक्रियता ने यह संदेश दे दिया है कि जेलों के भीतर अब अनुशासन के मामले में कोई समझौता नहीं होगा।
क्या हुआ बरामद?
घंटों चली इस सघन तलाशी और चप्पे-चप्पे को खंगालने के बाद कटिहार जेल से ब्लेड जैसी धारदार चीज बरामद हुई है और कुछ नकद रुपये भी मिले हैं। मिली जानकारी के मुताबिक अन्य किसी जेल से मोबाइल, सिम कार्ड या नशीले पदार्थ जैसी कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य जेल के भीतर अनुशासन बनाए रखना और बंदियों के बीच प्रशासन का खौफ कायम करना था। यह रेड मुख्यमंत्री के उस बयान के बाद हुई है जिसमें उन्होंने पुलिस को निचले स्तर तक सख्ती बरतने का आदेश दिया था।
