Bihar Bridge Collapse Bettiah: बिहार में पुलों के अचानक जमींदोज होने और ढहने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूबे में जहां एक तरफ नए पुलों के निर्माण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुराने और जर्जर पुल ताश के पत्तों की तरह बिखर रहे हैं। ताजा मामला पश्चिम चंपारण (बेतिया) जिले से सामने आया है, जहां मझौलिया प्रखंड में धनौती नदी पर बना करीब 35 साल पुराना 'गोडा पुल' अचानक भरभराकर ध्वस्त हो गया।
चश्मदीदों के मुताबिक, पुल का करीब 10 फीट का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सीधे नदी में समा गया। इस हादसे के बाद से बखरिया चौक NH-27 से लालसरैया होते हुए करमवा और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह ठप हो गया है।
आधा दर्जन पंचायतें प्रभावित, वैकल्पिक रास्ते का सहारा
पुल के अचानक टूट जाने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। इस घटना के कारण बखरिया, करमवा, लालसरैया और राजभार समेत करीब दस गांवों तथा आधा दर्जन पंचायतों का आपस में और जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है।
लंबा चक्कर काटने की मजबूरी: पश्चिमी चंपारण से पूर्वी चंपारण की ओर आने-जाने वाले राहगीरों और वाहनों के पहिए थम गए हैं। अब लोगों को कई किलोमीटर लंबा वैकल्पिक और घुमावदार रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
रोजमर्रा की जिंदगी बेपटरी: इस हादसे की सबसे गाज किसानों, स्कूली छात्रों, मरीजों और स्थानीय सब्जी विक्रेताओं पर गिरी है। मजबूरी में कई लोग जान जोखिम में डालकर टूटे पुल के किनारे और सूखी नदी के रास्ते से होकर पैदल ही अपने गंतव्य तक पहुंचने को मजबूर हैं।
महीनों से जर्जर था पुल, प्रशासन ने नहीं सुनी गुहार
स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है:
गड्ढे और टूटी रेलिंग: ग्रामीणों के अनुसार, यह पुल पिछले कई महीनों से बेहद जर्जर और खतरनाक स्थिति में था। पुल के बीचों-बीच एक बड़ा गड्ढा हो चुका था और उसकी सुरक्षा रेलिंग भी काफी समय पहले टूट चुकी थी।
शिकायतों को किया गया नजरअंदाज: स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को पुल की इस खस्ताहाल स्थिति से अवगत कराया था और अनहोनी की आशंका जताई थी। इसके बावजूद प्रशासन ने समय रहते न तो इसकी मरम्मत कराई और न ही आवागमन के लिए कोई वैकल्पिक पुख्ता व्यवस्था की, जिसके चलते आखिरकार यह पुल ढह गया।
