भोपाल

एमपी में MRP से महंगी शराब की बिक्री पर सुस्ती; 15 जिलों में ही हुई कार्रवाई, 106 दुकानों पर 2.32 करोड़ का जुर्माना

प्रदेश में शराब की बिक्री को लेकर तय की गई अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की अनदेखी लगातार हो रही है। कलेक्टरों द्वारा इस पर कार्रवाई न किए जाने से शराब दुकानों के ठेकेदार मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है, बल्कि सरकार के राजस्व और व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

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एमपी हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

Photo : Twitter

प्रदेश में शराब की निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक कीमत पर बिक्री के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन इस पर जिलों के कलेक्टरों द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसका सीधा लाभ शराब दुकानों के ठेकेदारों को मिल रहा है। आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने 13 मई को सभी जिला आबकारी अधिकारियों को निर्देशित किया था कि एमआरपी से अधिक मूल्य वसूलने वाले लाइसेंसधारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके बावजूद अब तक केवल 15 जिलों में ही जांच की गई है, जहां कई दुकानों पर एमआरपी से अधिक कीमत वसूली पाई गई।

इस मुद्दे को लेकर जबलपुर में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है, जिस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में जवाब मांगा है। जांच के दौरान बुरहानपुर, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नीमच, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, शिवपुरी, टीकमगढ़, उमरिया, इंदौर और भोपाल जिलों की शराब दुकानों पर जुर्माने की कार्रवाई की गई है। कुल 106 दुकानों पर अब तक 2.32 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है।

नई आबकारी नीति के तहत, यदि कोई दुकान एमआरपी से अधिक या न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) से कम पर शराब बेचती है, तो उसे एक दिन की लाइसेंस फीस के बराबर जुर्माना देना होता है। जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर दुकान को नोटिस जारी किया जाता है, और यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो कलेक्टर के समक्ष जुर्माने का प्रस्ताव भेजा जाता है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदी author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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