भगवान हनुमान भी आदिवासी हैं और प्रभुश्री राम को लंका ले जाने वाले आदिवासी थे। बंदरों की सेना की बात सच नहीं है। यह दावा मध्य प्रदेश में कांग्रेस के विधायक और पूर्व मंत्री उमंग सिंघार ने किया है। गंधवानी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सिंघार ने शुक्रवार (नौ जून, 2023) को धार जिले में एक रैली के दौरान कहा- राम को लंका ले जाने वाले आदिवासी ही थे।
जनसभा में उन्होंने बताया, कुछ लेखकों ने अपनी कहानियों में लिखा है कि बंदरों की एक सेना थी, लेकिन यह सच नहीं है। असल में सभी आदिवासी थे जो जंगल में रहते थे। कहानियां लिखने वाले तोड़मरोड़ कर देते हैं, लेकिन मैं कहता हूं कि हनुमान भी आदिवासी हैं। वे भगवान राम को लंका ले गए थे। अत: हम उन्हीं के वंशज हैं। हम बिरसा मुंडा, टंट्या मामा और हनुमान के वंशज हैं। गर्व से कहो कि हम आदिवासी हैं।
वैसे, इससे पहले कांग्रेस के एक और एमएलए अर्जुन सिंह काकोडिया ने भगवान शिव और बजरंगबली को आदिवासी बताया था। महीने की शुरुआत में बरघाट निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस विधायक काकोडिया ने दावा किया था, ‘‘मंथन से अमृत निकला था। समझदार लोगों ने अमृत पिया और विष बच गया...अब उस विष का क्या करें? वह जहर किसने पिया था? हिमालय में रहने वाले भोले भंडारी ने ही पिया था।’’ विधायक के मुताबिक, आदिवासियों को भोले भंडारी कहा जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘आदिवासियों ने जहर पीकर दुनिया को जीवन दिया। हमारा समाज कितना गौरवशाली है।”
मई महीने में उन्होंने कहा था कि बजरंगबली एक आदिवासी वनवासी थे जिन्होंने भगवान राम की रक्षा की और उनकी मदद की। उदेपानी गांव में कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष कमलनाथ की उपस्थिति में जनसभा को संबोधित कर रहते हुए काकोडिया ने यह भी कहा था, ‘‘कोई अयोध्या, क्षत्रिय या ब्राह्मण सेना नहीं थी, लेकिन (यह) आदिवासी समुदाय था (जिसने) भगवान राम की मदद की।’’ (समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)
