भोपाल

ADCP के नाम पर बनाई फर्जी फेसबुक ID, साइबर ठगों ने बिछाया जाल; क्राइम ब्रांच ने लिए एक्शन

साइबर ठगों ने भोपाल के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) के नाम और तस्वीर का दुरुपयोग कर फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाई। क्राइम ब्रांच ने साइबर ठगों के खिलाफ एक्शन लिया है।

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(सांकेतिक फोटो)

Photo : iStock

भोपाल : एमपी में फर्जीवाड़े और साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। साइबर ठग नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों को शिकार बना रहे हैं। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) के नाम और फोटो का उपयोग कर फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाने वाले साइबर ठगों के खिलाफ क्राइम ब्रांच की साइबर टीम ने महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब एक शिकायतकर्ता ने पुलिस को सूचित किया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने भोपाल के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त की फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाई है।

क्राइम ब्रांच का एक्शन

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक, इस गंभीर मामले को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने तुरंत एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू की। जांच में पता चला कि यह एक संगठित साइबर गिरोह है। गिरोह ने सबसे पहले एक नाबालिग लड़के के नाम पर सिम कार्ड सक्रिय किया। इसके लिए पीओएस एजेंट बीरबल प्रजापत ने नाबालिग को 1500 रुपये देकर बहला-फुसलाकर सिम एक्टिवेट कराई। बाद में, यह सिम 3000 रुपए में एक साइबर ठग को बेच दी गई। इसी सिम का उपयोग करके फर्जी फेसबुक प्रोफाइल चलाई जा रही थी।

साइबर टीम ने तकनीकी जानकारी के आधार पर अलवर (राजस्थान) में छापेमारी की और लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र से आरोपी बीरबल प्रजापत (40 वर्ष) और नाबालिग को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान दोनों ने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया है। यह कार्रवाई साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस की सतर्कता और तत्परता को दर्शाती है। हालांकि, ऐसे अनगिनत मामले हैं, जिनकी तह तक पहुंच पाना पुलिस के लिए भी बड़ा काम है। आए दिन ऐसे केस आ रहे हैं, जिसमें साइबर ठग लोगों को चूना लगा रहे हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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