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आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत, फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर; अगली सुनवाई पर टिकी सबकी निगाहें

रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को ध्वस्तीकरण मामले में फिलहाल बड़ी राहत मिली है। मुरादाबाद मंडल आयुक्त ने अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अब इस मामले में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद ही लिया जाएगा।

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान (फाइल फोटो)

Photo : PTI

Mohammad Ali Jauhar University: उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई के मामले में फिलहाल बड़ी राहत मिली है। मुरादाबाद मंडल के आयुक्त ने जिला अधिकारी रामपुर के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए अगली सुनवाई तक यूनिवर्सिटी परिसर में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद फिलहाल यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलने की संभावना टल गई है।

अगले आदेश तक नहीं होगी कार्रवाई

आयुक्त के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि जब तक मामले में आगे कोई निर्देश जारी नहीं होते, तब तक परिसर में किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी। अब दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस मामले की सुनवाई सोमवार को होनी थी, लेकिन न्यायालय में शोक अवकाश (कंडोलेंस) घोषित होने के कारण सुनवाई टल गई और अब नई तारीख पर होगी।

अवैध निर्माण को लेकर की गई कार्रवाई से जुड़ा मामला

बता दें कि यह पूरा मामला रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा यूनिवर्सिटी परिसर में कथित अवैध निर्माण को लेकर की गई कार्रवाई से जुड़ा है। प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत परिसर में मौजूद 38 भवनों को गिराने का आदेश जारी किया था।

निर्माणों को हटाने के निर्देश

आरडीए का दावा है कि यूनिवर्सिटी परिसर में निर्मित 38 भवन स्वीकृत मानचित्र के बिना बनाए गए हैं। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी प्रशासन को नोटिस जारी कर 15 दिनों के अंदर खुद इन निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय के भीतर पालन नहीं होने पर जिला प्रशासन अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा।

अगली सुनवाई सबकी निगाहें

हालांकि, आयुक्त द्वारा अंतरिम राहत दिए जाने के बाद फिलहाल यह कार्रवाई रोक दी गई है। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई और आयुक्त के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। जौहर यूनिवर्सिटी का यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष जहां इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई केवल भवन निर्माण नियमों के कथित उल्लंघन के आधार पर की जा रही है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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