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ASI की बड़ी खोज: तमिलनाडु में मिला प्राचीन 'ग्लोबल ट्रेड' का सबूत; अफगानिस्तान तक फैला था पूर्वजों का व्यापार

ASI Dindigul News: तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के कमनूर गांव में ASI को 7 डोल्मन चैंबर्स और प्राचीन हथियार मिले हैं। यहां मिली चीजें बताती हैं कि पहले यहां से अफगानिस्तान तक व्यापार होता था।

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खुदाई में मिले लैपिस लाजुली और कीमती पत्थरों के मनके (ASI)

Photo : Times Now Digital

Dindigul Excavation Site: तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले का एक छोटा सा गांव 'कमनूर' (Kamanur) इन दिनों इतिहास के पन्नों में और गाढ़े अक्षरों में जगह पाने की तैयारी कर रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की देखरेख में चल रहे उत्खनन ने एक ऐसी प्राचीन सभ्यता के रास्ते खोल दिए हैं, जो न केवल इंजीनियरिंग में माहिर थी, बल्कि हजारों मील दूर अफगानिस्तान और कई देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते भी रखती थी।

कमनूर का खजाना: 7 डोल्मन चैंबर्स और पूर्वजों की अनूठी इंजीनियरिंग

ASI की टीम को खुदाई के दौरान कमनूर में एक महापाषाण काल (लगभग 1500 ई.पू. - 500 ई.पू.) का व्यवस्थित दफन परिसर (Megalithic Burial Complex) मिला है, जिसमें 7 डोल्मन चैंबर्स (पत्थरों से बने कमरे) की पहचान की गई है। ये चैंबर दो पैरेलल पंक्तियों में सलीके से सजाए गए हैं, जो साबित करते हैं कि उस समय का समाज न केवल व्यवस्थित था, बल्कि निर्माण कला में भी माहिर था। सबसे दिलचस्प बात इन चैंबर्स को बनाने का तरीका है। प्राचीन बिल्डरों ने आधार को मजबूती देने के लिए मिट्टी, छोटे पत्थरों और टूटे हुए बर्तनों (Potsherds) के मिश्रण का इस्तेमाल किया था। पूरे परिसर को एक आयताकार पत्थर की दीवार से घेरा गया है, जिसे 'ड्राई मेसनरी' तकनीक से बनाया गया था।

ASI Dindigul Excavation

कमनूर में मिला महापाषाण काल का अद्भुत ढांचा (चित्र: @ASIGoI)

मिले युद्ध के औजार और कलात्मक बर्तन

उत्खनन के दौरान जमीन की गहराइयों से लोहे के कई प्राचीन औजार बरामद हुए हैं, जिनमें लोहे का चाकू, छेनी, तीर के नुकीले सिरे और तलवार शामिल हैं। ये हथियार उस दौर के रक्षा कौशल और धातु विज्ञान की उन्नत समझ की गवाही देते हैं। इसके अलावा, यहां से लाल बर्तन (Red Ware), काले बर्तन (Black Ware) और 'ब्लैक एंड रेड' श्रेणी के मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं, जो उस समय की पाक कला और रहन-सहन को दर्शाते हैं।

अफगानिस्तान से व्यापार और ग्लोबल कनेक्शन

इस खोज का सबसे रोमांचक हिस्सा यहां मिले कीमती पत्थर और मनके (Beads) हैं। शोधकर्ताओं को यहां से कार्नेलियन, अगेट, जैस्पर, और क्वार्ट्ज के साथ-साथ 'लैपिस लाजुली' (Lapis Lazuli) के मनके मिले हैं। गौर करने वाली बात यह है कि लैपिस लाजुली उस समय केवल अफगानिस्तान के क्षेत्रों में पाया जाता था। इतनी बड़ी मात्रा में इंडो-पैसिफिक ग्लास बीड्स का मिलना यह साबित करता है कि कमनूर का यह प्राचीन समाज किसी बंद दायरे में नहीं रहता था, बल्कि एक बड़े 'ग्लोबल ट्रेड नेटवर्क' का हिस्सा था। ये बीड्स महज सजावट की वस्तुएं नहीं थीं, बल्कि उस दौर के समृद्ध इतिहास, धार्मिक महत्व और प्रतिष्ठा के प्रतीक थे।

इतिहास की नई परिभाषा

कमनूर में चल रही यह खुदाई हमें बताती है कि दक्षिण भारत का यह हिस्सा हजारों साल पहले भी कितना विकसित था। व्यापारिक मार्गों के जरिए अफगानिस्तान तक पहुंच और पत्थरों को तराश कर व्यवस्थित शहर जैसा ढांचा बनाना, यह दर्शाता है कि हमारे पूर्वजों का विजन बहुत बड़ा था। ASI की यह खोज तमिलनाडु के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ रही है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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