Amritsar News: स्वतंत्रता दिवस से पहले पंजाब के अमृतसर जिले में पुलिस ने एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया। अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 690 ग्राम वजन की आईईडी बरामद की। आशंका है कि इस विस्फोटक का इस्तेमाल पुलिस से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए किया जाना था। आईईडी के साथ इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर, बैटरी, टाइमर और एक लोहे का बॉक्स भी मिला है।
पुलिस के मुताबिक, बरामद विस्फोटक काले रंग के मोम से लिपटे एक पैकेट में रखा हुआ था। सूचना मिलने के बाद बम डिस्पोजल स्क्वायड को मौके पर बुलाया गया। विशेषज्ञों ने निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आईईडी को मौके पर ही निष्क्रिय कर दिया। बरामद अन्य सामान को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने अमृतसर ग्रामीण पुलिस की सतर्कता की सराहना करते हुए कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता के कारण राष्ट्रविरोधी तत्वों की संभावित साजिश को समय रहते विफल किया जा सका। उन्होंने बताया कि मामले की जांच जारी है और विस्फोटक यहां तक पहुंचाने वाले लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर खास निगरानी
अमृतसर देहात के एसएसपी कंवलप्रीत सिंह चहल के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर जिले में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। प्रमुख स्थानों पर नाकाबंदी के साथ वाहनों और संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जा रही थी। सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही थी। इसी सुरक्षा अभियान के दौरान शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात एएसआई कुलबीर सिंह गग्गोमहन इलाके में गश्त कर रहे थे। इसी बीच पुलिस टीम को क्षेत्र में एक संदिग्ध वस्तु पड़े होने की सूचना मिली। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां काले रंग के मोम से लिपटा एक पैकेट दिखाई दिया। संदेह होने पर पुलिस ने इसकी जांच की, जिसमें आईईडी होने की पुष्टि हुई। पैकेट के अंदर इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर, बैटरी और टाइमर समेत अन्य उपकरण भी मौजूद थे।
पूरे मामले की जांच जारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया। टीम ने जरूरी सुरक्षा उपायों के साथ विस्फोटक को निष्क्रिय कर दिया। पुलिस ने मामले में थाना रामदास, अमृतसर ग्रामीण में एफआईआर नंबर 162 दर्ज की है। यह मामला एक्सप्लोसिव सब्सटेंसेज एक्ट की धारा 3, 4 और 5 के तहत दर्ज किया गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आईईडी मौके तक किसने पहुंचाई, इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं और संभावित निशाना क्या था। पुलिस संदिग्धों की पहचान और पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।
