रायपुर : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को जगदलपुर में आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक के समापन समारोह में शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने बस्तर के समग्र विकास और नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि नक्सलवादियों ने वर्षों तक बस्तर के विकास को बाधित किया। सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण में रुकावटें पैदा की गईं, जिसके कारण यह क्षेत्र पीछे रह गया। हालांकि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और सरकार पूरी ताकत के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है। शाह ने कहा कि बस्तर बदल रहा है, और जब 2026 में फिर से ओलंपिक होंगे, तो वे नक्सलवाद-मुक्त बस्तर में आयोजित किए जाएंगे।
शाह ने राज्य के बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में बस्तर ओलंपिक-2025 खेल आयोजन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए माओवादियों से अनुरोध किया कि वे हथियार डाल दें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जाएं। सरकार ने 31 मार्च, 2026 से पहले पूरे देश से ‘लाल आतंक’ को खत्म करने का फैसला किया है, यह लक्ष्य अब प्राप्ति के करीब है।
शाह ने कहा कि आज मैं बस्तर में आया हूं तब मुझसे ज्यादा आनंद किसी व्यक्ति को नहीं हो सकता है। हमने तय किया था कि 31 मार्च 2026 के पहले पूरे देश से लाल आतंक को खत्म कर देंगे, और आज बस्तर ओलंपिक 2025 में हम इसके कगार पर खड़े हैं। मैं 2024 में भी आया था, 2025 में भी आया हूं और 2026 में भी आऊंगा, यह मेरा वादा है। परंतु, जब मैं 2026 में बस्तर ओलंपिक के लिए पहुंचूंगा, तब तक छत्तीसगढ़ और पूरे देश से नक्सलवाद का सफाया हो चुका होगा।
देश को पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त बनाने का लक्ष्य
गृह मंत्री ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले पांच वर्षों में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग के सात जिलों - कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा - को दिसंबर 2030 तक देश के सबसे विकसित आदिवासी जिलों के रूप में विकसित किया जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि बस्तर के हर घर तक बिजली पहुंचाई जाएगी, हर परिवार को नल से जल उपलब्ध कराया जाएगा और लोगों को बेहतर जीवन स्तर मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास के साथ-साथ बस्तर की समृद्ध और अनूठी आदिवासी संस्कृति का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि विकास और परंपरा साथ-साथ आगे बढ़ें, ताकि बस्तर अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए नई ऊंचाइयों तक पहुंचे।
