लखनऊ : समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती द्वारा अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से ’पूरी तरह मुक्त’ किए जाने के कुछ घंटे बाद संकेत दिया कि उनकी पार्टी के दरवाजे आकाश के लिए खुले हो सकते हैं। लखनऊ में संवाददाता सम्मेलन में जब अखिलेश से पूछा गया कि यदि बसपा नेता आकाश आनंद सपा में शामिल होना चाहें तो क्या उन्हें पार्टी में जगह दी जाएगी, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि 'अगर आप उन्हें लेकर आएंगे, तो हम उन्हें ले लेंगे।
हालांकि, अखिलेश ने कहा कि आकाश आनंद को बसपा से हटाना उस पार्टी का आंतरिक मामला है और दूसरी पार्टियों के नेताओं को इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने मायावती के फैसले के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह उनकी पार्टी का फैसला है। दूसरी पार्टियों के लोग इस पर कुछ नहीं कह सकते। बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को घोषणा की थी कि आकाश आनंद को पार्टी से ’पूरी तरह मुक्त’ कर दिया गया है। इससे कुछ ही समय पहले उनके ससुर और पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी।
आकाश आनंद ’दुविधा में-मायावती
मायावती ने कहा कि आकाश आनंद ’दुविधा में रहने वाले’ व्यक्ति नजर आए और सवाल उठाया कि जब उनकी निजी और पारिवारिक रुचियां राजनीतिक करियर और बहुजन आंदोलन से ऊपर दिखाई दे रही हों तो क्या वह पार्टी के लिए प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। उन्होंने आकाश आनंद द्वारा उनके एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को दोबारा साझा नहीं किए जाने का भी जिक्र किया और कहा कि इससे संकेत मिलता है कि उनका झुकाव बसपा और आंदोलन के बजाय पारिवारिक रिश्तों की ओर अधिक है।
आकाश आनंद को इससे पहले तीन सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक समेत सभी महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था। यह घटनाक्रम आकाश आनंद के राजनीतिक सफर में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। मायावती ने कभी उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बताया था।
यह विवाद आकाश आनंद द्वारा पहले अखिलेश यादव पर किए गए सार्वजनिक हमलों की पृष्ठभूमि में सामने आया है। पिछले महीने हाथरस में बसपा की एक जनसभा को संबोधित करते हुए आनंद ने अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने अपनी उम्र और राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए यादव को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि वह 30 साल के हैं और अखिलेश यादव 50 साल के, इसलिए उन्हें यादव को ’चाचा’ कहने के अलावा और क्या संबोधित करना चाहिए।
जब अखिलेश यादव से गुरुवार को आकाश आनंद द्वारा उन्हें ’चाचा’ कहे जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हिंदी में इस शब्द के कई अर्थ हो सकते हैं, जैसे ’चाचा’, ’मौसा’ या ’फूफा’। इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें हैरानी है कि किसी ने उनसे ’फूफा’ को लेकर सवाल नहीं किया। अखिलेश की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालिया ’नाराज फूफा’ वाले संदर्भ के बाद आई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं को पारिवारिक समारोहों में नाराज रिश्तेदारों के रूप में दिखाने वाले कई मीम सामने आए थे।
