आगरा: इन दिनों त्योहारी सीजन के चलते जगह-जगह रामलीला का मंचन हो रहा है। लेकिन, गुरुवार को ताजनगरी के रामलीला मैदान पर चल रही रामलीला मंचन के दौरान अजीब वाक्या देखने को मिला। यहां जीआरपी के एक सिपाही ने मंच पर चढ़कर जमकर हंगामा किया। सिपाही हरीशचंद्र नशे में टल्ली होकर पहुंचा और अशोभनीय अभद्र व्यवहार किया। मंच के पास मौजूद लोगों का कहना है कि सीताहरण का संवाद चल रहा था लिहाजा, उसने कहा 'मैं सीता हरण नहीं होने दूंगा'.‘मैं हनुमान भक्त हूं। हालांकि, इसका एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा है, लेकिन साउंड की आवाज के आगे उसकी आवाज सुनाई नहीं पड़ रही है। सिपाही की इस हरकत के चलते उसे निलंबित कर दिया गया है।
दरअसल, आगरा किला के सामने स्थित रामलीला मैदान में श्रीरामलीला महोत्सव का आयोजन चल रहा है। गुरुवार रात को लीलाओं का मंचन जारी था। इस दौरान रामलीला कमेटी के अध्यक्ष और भाजपा विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल सहित अन्य प्रतिष्ठित गढ़मान्य लोग मौजूद थे। मंच पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) का सिपाही हरीशचंद्र भी मौजूद था। इससे पहले कोई कुछ समझ पाता वो अचानक वो उठा और अशोभनीय व्यवहार करने लगा। खुद विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल सिपाही का हाथ पकड़ उसे मंच से उतरने के लिए कह रहे थे। इसी बीच अन्य सिपाही भी आ गए और हरीशचंद्र को नीचे उतार कर ले गए। सिपाही हरीशचंद्र का मेडिकल कराया गया, जिसमें उसके अल्कोहल लेने की पुष्टि हुई है।
सिपाही हरीशचंद्र निलंबित
शुक्रवार को इंटरनेट मीडिया पर तेजी के साथ सिपाही के अशोभनीय व्यवहार का वीडियो वायरल हो गया। वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए एसपी रेलवे आदित्य लांग्हे ने सिपाही हरीशचंद्र को निलंबित कर दिया। सिपाही जीआरपी लाइन में तैनात था। हालांकि, रामलीला महोत्सव में सिपाही की ड्यूटी नहीं थी। बावजूद इसके बाद भी वो वर्दी में वहां पहुंचा था।
स्पष्ट नहीं सुनाई दे रही आवाज
वायरल वीडियो में सिपाही बोल रहा है कि 'मैं सीता हरण नहीं होने दूंगा'! वीडियो में सिपाही कुछ बोलता तो नजर आ रहा है। लेकिन, वास्तव में वह क्या बोल रहा है? यह साउंड की आवाज के कारण स्पष्ट सुनाई नहीं दे रहा है। चर्चा है कि वह कह रहा था ‘मैं हनुमान भक्त हूं, माता सीता का हरण नहीं होने दूंगा’।
श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष और विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने बताया कि सिपाही की आवाज ही नहीं निकल रही थी। वो शराब में पूरी तरह टल्ली था। गुरुवार को रामजन्म की लीला का मंचन चल रहा था। इसलिए सीता हरण को लेकर सिपाही द्वारा कुछ कहे जाने का अर्थ ही नहीं है
