हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश का दौर जारी है। भारी बारिश के कारण कहीं बादल फटने की खबर सामने आ रही है तो वहीं कई स्थानों पर लैंडस्लाइड होने की सूचना भी आए दिन मिल रही है। मानसूनी बारिश के दौरान हिमाचल प्रदेश में जान-मान का भारी नुकसान हुआ है। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के अनुसार, भूस्खलन, अचानक आई बाढ़, बादल फटने, डूबने, बिजली गिरने, करंट लगने और अन्य मौसम संबंधित घटनाओं में 20 जून से अभी तक 310 लोगों की मौत हो चुकी है। SDMA ने यह भी बताया कि इस दौरान 152 लोगों की मौत सड़क दुर्घटना के कारण हुई है।
किन शहरों में हुई बारिश संबंधित सबसे अधिक मौतें
SDMA के आंकड़ों के अनुसार, बारिश से होने वाली घटनाओं के कारण सबसे ज्यादा मौतें मंडी, कांगड़ा, चंबा, किन्नौर और कुल्लू में हुई हैं। एसडीएमए के अनुसार, अकेले भूस्खलन और अचानक बाढ़ ने कम से कम 19 लोगों की जान ली है, जिनमें डूबने से 33 मौतें हुई हैं। बिजली गिरने और बारिश से जुड़ी अन्य दुर्घटनाओं ने भी मृतकों की संख्या को बढ़ाया है।
कांगड़ा - 30
मंडी - 29
चंबा - 14
किन्नौर - 14
कुल्लू - 13
आंकड़ों के अनुसार, फिसलन भरी सड़कों, कम दृश्यता और भूस्खलन के मलबे के बीच बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं में चंबा और मंडी में 22-22, कांगड़ा में 19, सोलन में 16 और शिमला में 15 लोगों की मौत हो गई। बिलासपुर में 7, किन्नौर में 14, कुल्लू में 13 और अन्य जिलों में भी घातक दुर्घटनाएं दर्ज की गई।
आजीविका को पहुंचा नुकसान
हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण बुनियादी ढांचे और आजीविका को भी भारी नुकसान हुआ है। इस दौरान अनुमानित तौर पर सार्वजनिक संपत्ति में 2.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जिसमें लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सड़कों के नुकसान में 1.31 लाख करोड़ रुपये, जल शक्ति विभाग (जेएसवी) ने जलापूर्ति और सिंचाई के नुकसान में 87,226 करोड़ रुपये और बिजली क्षेत्र ने बिजली के बुनियादी ढांचे को 13,946 करोड़ रुपये का नुकसान होने की सूचना दी है।
निजी संपत्ति को व्यापक नुकसान हुआ है, जिसमें 324 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं, 396 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, और हजारों दुकानें, गौशालाएं और अन्य संरचनाएं प्रभावित हुई हैं। रिपोर्ट में 1,846 से ज्यादा पशुधन और 25,755 मुर्गी पक्षियों की मौत का भी जिक्र है।
बारिश के कारण बाधित हुई बिजली व्यवस्था और राजमार्ग
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) की मानें तो भारी बारिश के कारण तीन राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 670 से ज्यादा सड़कें अवरुद्ध हो गईं, 1,413 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर बाधित हुए और 420 जलापूर्ति योजनाएं ठप हो गई।
