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मासूम सावित्री के सपनों को फिर मिले पंख, अग्निकांड में जलकर राख हुईं किताबें तो अखिलेश यादव ने दिया सहारा

सीतापुर के सदरपुर क्षेत्र के सरैंया चलांकापुर गांव में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को बेघर कर दिया और उनका सारा सामान जलकर राख हो गया। इस हादसे में एक 8 साल की बच्ची सावित्री का स्कूल बैग भी जल गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और अधजली किताब से ही पढ़ाई जारी रखी। उसकी लगन और जज्बे ने सभी का दिल छू लिया, यहां तक कि उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी लेने की घोषणा भी की गई।

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मासूम सावित्री के सपनों को दिए अखिलेश यादव ने नए पंख (फोटो: PTI)

Photo : PTI

Sitapur News: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के सदरपुर क्षेत्र स्थित सरैंया चलांकापुर गांव में शनिवार को लगी भीषण आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इसी आग में गांव के निवासी हरिश्चंद्र की 8 साल की बेटी सावित्री का स्कूल बैग भी पूरी तरह जलकर खाक हो गया। अगले दिन सुबह जब गांववाले अपने घरों से जले और अधजले सामान को बाहर निकाल रहे थे, तभी सावित्री अपने जले हुए बस्ते में से बची एक अधजली किताब लेकर पेंसिल से अपना होमवर्क करती नजर आई।

पूरा सामान आग में जलकर हो गया राख

उस मासूम बच्ची को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसके घर का पूरा सामान आग में जलकर खत्म हो चुका है। इसी दौरान घर के पास मौजूद किसी व्यक्ति ने उसकी तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर साझा कर दी। यह तस्वीर जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंची, तो उन्होंने भावुक होकर बच्ची की आगे की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की।

पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती है सावित्री

ऐसे में मीडिया टीम सावित्री के घर पहुंची और उससे बातचीत की। सावित्री ने बताया कि वह गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 4 में पढ़ती है। वह नियमित रूप से स्कूल जाती थी और मन लगाकर पढ़ाई करती थी, लेकिन आग में उसकी सभी किताबें जल गईं। हालांकि अब उसे नई किताबें मिल चुकी हैं। उसने कहा कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती है।

बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं

सावित्री के पिता हरिश्चंद्र और माता संगीता ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उनके पास केवल करीब 15 बिसुवा जमीन है, जिससे गुजारा संभव नहीं हो पाता, इसलिए वह मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में सावित्री के अलावा 4 साल की बेटी सीमा और 3 साल का बेटा दिपांशु भी हैं।

ग्राम प्रधान कर रहे हैं परिवार के लिए खाने का इंतजाम

हरिश्चंद्र का कहना है कि वह बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं करना चाहते। इसी वजह से आर्थिक तंगी के बावजूद वह अपनी बेटी सावित्री को अच्छी शिक्षा दिलाकर उसे एक अधिकारी बनाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि आग लगने के बाद घर का चूल्हा भी नष्ट हो गया है, जिससे फिलहाल घर में खाना बन पाना संभव नहीं है। ऐसे में गांव के लोग, आसपास के मददगार व्यक्ति और ग्राम प्रधान परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। साथ ही सरकार और अन्य जनप्रतिनिधियों की ओर से भी राशन उपलब्ध कराया गया है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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