भारत के हाउसिंग मार्केट में महिलाएं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। मैजिकब्रिक्स की ताजा सर्वे रिपोर्ट से पता चलता है कि प्रॉपर्टी के मालिकाना हक और निवेश को लेकर महिलाओं के नजरिए में बड़ा बदलाव आया है। मैजिकब्रिक्स डेटा से पता चलता है कि महिलाएं रियल एस्टेट को मुख्य रूप से एक फाइनेंशियल एसेट क्लास के तौर पर देख रही हैं। इनमें से लगभग 73% महिलाएं रेंटल इनकम (35%), कीमत में वृद्धि (25%), और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन (13%) को अपने मुख्य फाइनेंशियल गोल के तौर पर प्राथमिकता दे रही हैं। इससे पता चलता है कि महिलाएं रियल एस्टेट को पूरी तरह से कंजम्प्शन-बेस्ड खरीदारी के बजाय बड़े पैमाने पर एक फाइनेंशियल एसेट क्लास के तौर पर देख रही हैं।
निवेश के लिए गगनचुंबी इमारतें पहली पंसद
इन्वेस्टमेंट-फर्स्ट वाली यह सोच सीधे तौर पर प्रॉपर्टी टाइप की पसंद पर असर डाल रही है, जिसमें मल्टी-स्टोरी अपार्टमेंट की डिमांड 52% है। इस फॉर्मेट का मैनेज्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, रीसेल लिक्विडिटी और रेंटल वायबिलिटी इसे फाइनेंशियली ड्रिवन खरीदारों के लिए खास तौर पर आकर्षक बनाती है। दिल्ली NCR महिलाओं की भागीदारी के लिए सबसे मजबूत रीजनल हब के रूप में उभरा है, जो कुल हिस्सेदारी का 41% है, जो देशभर में सबसे ज्यादा है। इस रीजन में, दिल्ली (18%) और नोएडा/ग्रेटर नोएडा (16%) हिस्सेदारी के साथ क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर है।
महिलाएं अब रियल एस्टेट निवेश में आगे: CMO प्रसून कुमार
इस ट्रेंड पर प्रतिक्रिया देते हुए, मैजिकब्रिक्स के CMO, प्रसून कुमार ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर हम एक बड़ा बदलाव देख रहे हैं। अब महिलाएं सिर्फ सलाह देने वाली नहीं, बल्कि रियल घर/प्रॉपर्टी तलाशने की प्रक्रिया और खरीद के फैसलों लेने के लिए आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। हमारी रिसर्च बताती है कि 75 लाख रुपये से अधिक कीमत के घर खरीदने वाली 45% महिलाएं लंबी अवधि में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने और रेंटल इनकम को प्राथमिकता देती हैं। यह उस बड़े ट्रेंड से मेल खाता है, जिसमें 73% महिलाएं प्रॉपर्टी को आय का जरिया वाली संपत्ति के रूप में देखती हैं।
अब महिलाएं खुद होम लोन लेने का फैसला ले रही हैं और घर के इंटीरियर से जुड़े निर्णयों पर फैसला ले रही हैं। यह बढ़ते फाइनेंशियल कॉन्फिडेंस और फाइनेंसिंग और इंटीरियर में इंटीग्रेटेड सॉल्यूशन की डिमांड को दिखाता है। आज प्रॉपर्टी का मालिकाना हक सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संगठित तरीके से संपत्ति और वेल्थ क्रिएशन का जरिया बनता जा रहा है।
आगे यह ट्रेंड घर के प्रकार की पसंद में भी साफ दिखता है। 81% महिलाएं 2बीएचके और 3 BHK घरों को प्राथमिकता देती हैं। आकार के लिहाज से 56% महिलाएं 1000 से 2000 वर्ग फुट के बीच के घर पसंद करती हैं। इससे पता चलता है कि महिलाएं ऐसे मिड-साइज घरों का सोच-समझकर चयन कर रही हैं, जो किराए की मांग और लंबी अवधि में मूल्य बढ़ने, दोनों के लिहाज से बेहतर हों। इसके अलावा 75 लाख रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये की कीमत वाले घरों की मांग सबसे अधिक है। 45% महिलाएं इस सेगमेंट में घर खरीदने को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे साफ है कि महिला खरीदार मुख्य रूप से मिड से अपर-मिड सेगमेंट की प्रॉपर्टी की ओर रुख कर रही हैं।
