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Closing Bell: सिर्फ ट्रेड डील नहीं इन 5 वजहों से आई तूफानी तेजी, 268 स्टॉक्स में अपर सर्किट, 1 साल के टॉप पर 121 शेयर, मार्केट कैप 5.16 ट्रिलियन डॉलर

1 फरवरी को बजट के दिन आई भारी गिरावट से उबरते हुए सिर्फ दो दिन में निवेशकों की पूंजी में 20 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। बाजार में तेजी का सबसे बड़ा ट्रिगर यूएस-इंडिया ट्रेड डील रही। लेकिन, यह अकेली वजह नहीं, जिससे बाजार में तूफानी तेजी आई है।

Stock Market Closing

शेयर बाजार में आई तेजी

Photo : iStock

घरेलू शेयर बाजार में 3 फरवरी को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। दिन के अंत में बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ। शुरुआती रिकॉर्ड गैप-अप ओपनिंग के बाद दिनभर हल्की मुनाफावसूली भी दिखी, लेकिन खरीदारी का दम बना रहा। निफ्टी दिन में 26,308.05 पर खुलकर 26,341.20 के इंट्रा डे हाई तक पहुंचा और 25,641.30 का इंट्रा डे लो छूने के बाद आखिर में 624.90 अंक यानी 2.49% की मजबूती के साथ 25,713.30 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 85,323.20 पर मजबूत शुरुआत के बाद 85,871.73 का हाई और 83,501.22 का लो छूते हुए दिन के अंत में 2,072.67 अंक यानी 2.54% की तेजी के साथ 83,739.13 पर बंद हुआ।

बाजार की चौतरफा मजबूती के संकेत

बाजार की ब्रेड्थ आज बेहद मजबूत रही। कुल 4,422 शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें से 3,299 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। इस दौरान 121 शेयर अपने 1 साल के हाई पर पहुंचे, जबकि 268 शेयरों में अपर सर्किट लगा, जो मजबूत खरीदारी का संकेत है। इसकी वजह से मार्केट कैप में भी जबरदस्त उछाल आया है, जो अब बढ़कर 5.16 ट्रिलियन डॉलर यानी 4,67,07,989.55 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। जबकि, बजट के दिन गिरावट के बाद यह 45,040,389.91 करोड़ रुपये रह गया था।

बड़े शेयरों ने दी तेजी को ताकत

रिलायंस, HDFC बैंक, ICICI बैंक, SBI, L&T, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस और अडानी समूह के शेयरों में मजबूत खरीदारी से इंडेक्स को बड़ा सपोर्ट मिला। अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स और जियो फाइनेंशियल जैसे शेयरों में 8–10% तक की तेजी दर्ज हुई।

सिर्फ ट्रेड डील नहीं, इन 5 वजहों से आई तेजी

बाजार की तेजी सिर्फ भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा तक सीमित नहीं रही। अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाने की खबर से एक्सपोर्ट सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद बनी। भारत को क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर टैरिफ पोजिशन मिलने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। रुपये में मजबूती और विदेशी निवेश की उम्मीद ने बाजार को सहारा दिया। एशियाई और अमेरिकी बाजारों से भी मजबूत संकेत मिले। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने महंगाई और आयात बिल को लेकर चिंता घटाई।

  1. भारत-अमेरिका ट्रेड डील बनी सबसे बड़ा ट्रिगर : अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील की घोषणा बाजार के लिए सबसे बड़ा पॉजिटिव ट्रिगर साबित हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ में बड़ी कटौती की गई है, जिससे आईटी, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट सेक्टर को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। निवेशकों ने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर के रूप में देखा, जिसके चलते बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली।
  2. एशियाई प्रतिस्पर्धियों पर भारत को टैरिफ एडवांटेज : नए टैरिफ ढांचे के बाद भारत कई एशियाई प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में दिख रहा है। बांग्लादेश, वियतनाम, श्रीलंका और अन्य देशों पर अपेक्षाकृत ज्यादा टैरिफ जारी रहने से भारतीय कंपनियों के लिए एक्सपोर्ट ऑर्डर बढ़ने की संभावना मजबूत हुई है। इससे निवेशकों को लगा कि आने वाले समय में भारत की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है।
  3. रुपये में मजबूती से लौटा भरोसा : ट्रेड डील की खबर के बाद विदेशी निवेश की उम्मीद बढ़ी और रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। मजबूत रुपया विदेशी निवेशकों के भरोसे का संकेत माना जाता है और इससे बाजार में निवेश का माहौल बेहतर हुआ। रुपये में मजबूती से आयात लागत और महंगाई दबाव कम होने की उम्मीद भी बनी, जिसने बाजार को सपोर्ट दिया।
  4. वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेत : एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली, जिससे भारतीय बाजार को सपोर्ट मिला। कोरिया, जापान, चीन और हांगकांग के बाजार बढ़त में रहे, जबकि अमेरिकी बाजार भी सकारात्मक बंद हुए। ग्लोबल स्तर पर जोखिम लेने की धारणा सुधरने से भारतीय बाजार में भी निवेशकों ने आक्रामक खरीदारी की।
  5. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी : ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट भारतीय बाजार के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत रही। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत का आयात बिल कम होता है और महंगाई पर दबाव घटता है। इससे सरकार और कंपनियों दोनों के लिए लागत का दबाव कम होने की उम्मीद बनती है, जो इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करती है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज तेजी के बाद निकट अवधि में कुछ मुनाफावसूली संभव है, लेकिन अगर विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ता है तो बाजार की तेजी का ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है। कुल मिलाकर, फरवरी की शुरुआत भारतीय बाजार के लिए दमदार रही और निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखा।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

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यतींद्र लवानिया
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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