बिजनेस

शेयर बाजार में हाहाकार! 636 अंक गिरा सेंसेक्स, निफ्टी 25159 तक फिसला, 4 वजहों से मचा कोहराम

Share Market Open in Red: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली हावी है। पिछले लगातार दो सत्रों की तेजी पूरी तरह खत्म हो गई है। इसकी वजह से निफ्टी जहां 25200 के अहम लेवल से नीचे खिसक गया है। वहीं, सेंसेक्स में भी 636 अंक की बड़ी गिरावट आई है। इसके अलावा भारतीय बाजार में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 5 लाख करोड़ डॉलर से नीचे आ गया है।

Image

शेयर बाजार में आई गिरावट

Photo : iStock

Share Market Today: गुरुवार को शुरुआती कारोबार में ही बाजार पर बिकवाली हावी नजर आई। Nifty 50 ने 25,345 के आसपास मजबूती के साथ ओपनिंग की, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिक नहीं पाया और फिसलकर 25,159.80 के डे लो तक आ गया, जबकि दिन का हाई 25,359.35 रहा। यानी इंट्रा डे आधार पर निफ्टी करीब 200 अंकों के दायरे में उतार-चढ़ाव करता दिखा और 10.37 बजे 123 अंकों की गिरावट के साथ 25,218 के आसपास ट्रेड कर रहा था। वहीं Sensex ने 82,369 के स्तर से कारोबार शुरू किया, दिन में 82,387 तक चढ़ा, लेकिन इसके बाद तेज बिकवाली के दबाव में 81,708 के डे लो तक फिसल गया। इस तरह सेंसेक्स में डे हाई से डे लो के बीच करीब 680 अंकों की बड़ी इंट्रा डे रेंज देखने को मिली। बाजार की ब्रेड्थ कमजोर रही, जहां डिक्लाइन शेयरों की संख्या एडवांस से दोगुनी से ज्यादा रही, जो साफ संकेत देता है कि गिरावट व्यापक रही।

इंडेक्स में कमजोरी जारी

सुबह करीब 10:45 बजे Sensex 517.64 अंक यानी 0.63% की गिरावट के साथ 81,827.04 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 150.65 अंकों की कमजोरी के साथ 25,192 के आसपास फिसल गया। बाजार की ब्रेड्थ कमजोर रही और ज्यादातर सेक्टर्स में बिकवाली का दबाव नजर आया। बीते दो कारोबारी सत्रों में बेंचमार्क इंडेक्स करीब एक प्रतिशत चढ़ चुके थे। India-EU ट्रेड डील को लेकर बनी पॉजिटिविटी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा काटना शुरू किया। इसका असर IT, FMCG और खासतौर पर ऑटो शेयरों पर दिखा, जहां चौतरफा बिकवाली देखने को मिली।

ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव

सेक्टोरल फ्रंट पर Nifty Auto इंडेक्स टॉप लूजर्स में रहा। Maruti Suzuki के कमजोर तिमाही नतीजों ने पूरे सेक्टर की सेंटिमेंट को चोट पहुंचाई। लेबर कोड से जुड़ा वन-टाइम चार्ज और कच्चे माल की लागत बढ़ने से कंपनी का मुनाफा अनुमान से कम रहा, जिसका असर दूसरे ऑटो शेयरों पर भी दिखा।

गिरावट के चार बड़े कारण

1. Fed के रुख से बढ़ी सतर्कता

ओवरनाइट, US Federal Reserve ने ब्याज दरों को यथावत रखा। फेड ने लगातार तीन तिमाही कटौती के बाद अब रेट कट पर विराम का संकेत दिया है। चेयरमैन Jerome Powell ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन महंगाई अब भी पूरी तरह काबू में नहीं आई है। बाजार फिलहाल जून की पॉलिसी से पहले किसी नई कटौती को डिस्काउंट नहीं कर रहा है, जिससे उभरते बाजारों के लिए माहौल थोड़ा चुनौतीपूर्ण बन गया।

2. India VIX में उछाल से बढ़ी अनिश्चितता

मार्केट वोलैटिलिटी का संकेत देने वाला इंडिया VIX करीब 4 प्रतिशत उछलकर 14 के ऊपर पहुंच गया। VIX में तेजी का मतलब है कि निवेशक आने वाले सत्रों को लेकर ज्यादा सतर्क हो रहे हैं और रिस्क लेने से बच रहे हैं। इसी वजह से खरीदारी सीमित नजर आई।

3. ग्लोबल संकेत और कच्चा तेल बने सिरदर्द

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का Nikkei और चीन का Shanghai Composite लाल निशान में ट्रेड करते दिखे। वहीं ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत चढ़कर 69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे आयातक देश के लिए नकारात्मक मानी जाती है।

4. रुपया ऑल टाइम लो पर

गुरुवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के ऑल टाइम लो तक फिसल गया। डॉलर इंडेक्स में मजबूती, फेड के सख्त रुख और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी पर दबाव बढ़ा। कमजोर रुपये ने भी इक्विटी बाजार की चाल को सुस्त कर दिया।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article