क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में इस वक्त कोहराम मचा हुआ है। दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय डिजिटल करेंसी, बिटकॉइन (Bitcoin), अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ हफ्तों में बिटकॉइन की कीमत में 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशक इस बात से डरे हुए हैं कि क्या यह गिरावट सिर्फ एक मामूली सुधार है या फिर यह बिटकॉइन के अंत की शुरुआत है। बाजार में यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि क्या बिटकॉइन की कीमत वाकई जीरो (शून्य) हो जाएगी? हालिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुमानों ने इस डर को और ज्यादा हवा दे दी है।
एक महीने में ही इतनी गिर गई वैल्यू
अर्श से फर्श पर आया बिटकॉइन एक समय था जब बिटकॉइन नई ऊंचाइयों को छू रहा था और लोग इसे 'डिजिटल गोल्ड' मानकर भारी निवेश कर रहे थे। लेकिन फरवरी 2026 की शुरुआत के साथ ही इसमें बिकवाली का ऐसा दौर शुरू हुआ कि इसकी वैल्यू देखते ही देखते आधी रह गई। विश्लेषकों का मानना है कि बिटकॉइन अपनी पीक वैल्यू से 50% से ज्यादा टूट चुका है। डराने वाली बात यह है कि कई दिग्गज मार्केट एक्सपर्ट्स अब यह दावा कर रहे हैं कि यहां से भी बिटकॉइन में 55 प्रतिशत की और गिरावट आ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह कई सालों के निचले स्तर पर पहुंच जाएगा, जिससे निवेशकों की पूंजी पूरी तरह साफ हो सकती है।
क्या यह एक 'स्कैम' है? एक्सपर्ट्स की कड़वी राय कुछ वित्तीय विशेषज्ञों ने तो यहां तक कह दिया है कि बिटकॉइन का कोई बुनियादी आधार नहीं है और यह एक 'स्कैम' या सट्टेबाजी के अलावा और कुछ नहीं है। उनका तर्क है कि चूंकि बिटकॉइन के पीछे किसी देश की सरकार या केंद्रीय बैंक (जैसे भारत में RBI) की गारंटी नहीं है, इसलिए इसकी कीमत केवल लोगों के भरोसे पर टिकी है। जब यह भरोसा टूटता है, तो इसकी कीमत ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है। सोशल मीडिया और ग्लोबल न्यूज चैनलों पर यह बहस छिड़ गई है कि बिटकॉइन की 'इंट्रिंसिक वैल्यू' (वास्तविक मूल्य) जीरो है और देर-सबेर यह मिट्टी में मिल सकता है।
क्या है गिरावट का कारण?
गिरावट के पीछे के बड़े कारण इस क्रैश के पीछे कई वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। पहला, अमेरिका सहित दुनिया भर के देशों में रेगुलेशन (नियमों) को लेकर सख्ती बढ़ गई है। सरकारें अब क्रिप्टोकरेंसी पर भारी टैक्स लगाने और इसे नियंत्रित करने की तैयारी में हैं। दूसरा, ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता और ब्याज दरों में हो रहे बदलावों के कारण निवेशक जोखिम भरे निवेश (Risk Assets) से अपना पैसा निकालकर सोने या फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे सुरक्षित विकल्पों में डाल रहे हैं। इसके अलावा, बड़े निवेशकों (जिन्हें 'Whales' कहा जाता है) द्वारा की गई भारी बिकवाली ने भी आम निवेशकों के मन में घबराहट (Panic) पैदा कर दी है।
क्या वाकई जीरो हो जाएगी कीमत?
हालांकि एक बड़ा तबका इसे खत्म होने की बात कह रहा है, लेकिन क्रिप्टो समर्थकों का मानना है कि बिटकॉइन पहले भी कई बार 80-90 प्रतिशत तक गिरा है और फिर से बाउंस बैक किया है। लेकिन इस बार चुनौती बड़ी है क्योंकि बाजार का माहौल पूरी तरह बदल चुका है। यदि 55% और गिरावट का अनुमान सच साबित होता है, तो बिटकॉइन का दोबारा खड़ा होना नामुमकिन सा हो जाएगा। कई जानकारों का कहना है कि यह 'बबल' (बुलबुला) अब फटने के कगार पर है।
अभी कितनी है कीमत?
बिटकॉइन (Bitcoin) इस समय भारी गिरावट के दौर से गुजर रहा है। वर्तमान में इसकी कीमत लगभग $68,455.72 है, जो पिछले एक महीने में 28.14% तक गिर चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मात्र 4 महीने पहले (अक्टूबर 2025 में) बिटकॉइन ने $126,198.07 का अपना अब तक का सबसे उच्चतम स्तर (All-time high) छुआ था, जिससे यह अब करीब 45.79% नीचे आ चुका है। बाजार में बिटकॉइन की कुल वैल्यू (Market Cap) भी घटकर $1.36 ट्रिलियन रह गई है। हालांकि पिछले 24 घंटों में इसके ट्रेडिंग वॉल्यूम में 10.69% की बढ़त देखी गई है, लेकिन इसकी कीमत अपने उच्चतम स्तर से लगभग आधी रह जाना निवेशकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
