म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में अब एक नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है Systematic Withdrawal Plan (SWP) की ओर निवेशकों और एक्सपर्ट्स दोनों की दिलचस्पी बढ़ रही है। जहां पहले लोग SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने पर ध्यान देते थे, वहीं अब SWP को रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम और टैक्स बचत का बेहतर तरीका माना जा रहा है। आइए आपको डिटेल में बताते हैं दोनों के फायदे और एक्सपर्ट्स SWP के लिए क्यों निवेशकों को मोटिवेट कर रहे हैं ये भी जानते हैं?
दोनों में क्या है अंतर?
दरअसल, SIP और SWP में मूल अंतर यही है कि SIP में निवेशक हर महीने पैसा जमा करते हैं, जबकि SWP में निवेशक अपने निवेश से हर महीने पैसा निकालते हैं। रिटायरमेंट के बाद जब मंथली सैलरी बंद हो जाती है तब SWP निवेशकों को एक फिक्स्ड मंथली इनकम का जरिया बनता है।
एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप अपने निवेश से सालाना लगभग 3.5%–4% की दर से निकासी करते हैं, तो आपका कॉर्पस 30 साल से भी ज्यादा समय तक चल सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी निवेशक ने ₹50 लाख का इक्विटी म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो बनाया है और उस पर औसतन 8% रिटर्न मिल रहा है, तो वह हर साल ₹1.75 से ₹2 लाख तक निकाल सकता है यानी लगभग ₹14,600 से ₹16,700 महीना। इस तरह निवेश पर रिटर्न भी बना रहता है और टैक्स का बोझ भी धीरे-धीरे कम होता है।
कैसे फायदेमंद होगा ये विकल्प?
हालांकि, यह रणनीति तभी कारगर साबित होती है जब मार्केट का प्रदर्शन स्थिर बना रहे। अगर लंबे समय तक बाजार में गिरावट बनी रही या रिटर्न अपेक्षाकृत कम मिला, तो कॉर्पस जल्दी खत्म हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि SWP का इस्तेमाल सोच-समझकर करें सही फंड का चयन, उचित निकासी दर और लंबे समय का नजरिया बहुत जरूरी है।
कुल मिलाकर, SIP जहां निवेश की शुरुआत का जरिया है, वहीं SWP स्मार्ट रिटायरमेंट इनकम प्लानिंग का नया नाम बनकर उभर रहा है। यही वजह है कि म्यूचुअल फंड विशेषज्ञ अब निवेशकों को SWP के जरिए अपनी वित्तीय आजादी को और मजबूत करने की सलाह दे रहे हैं।
