दुनिया की सबसे वैल्यूएबल टेक कंपनी 'एपल' (Apple) एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। लगभग 15 सालों तक कंपनी को सफलता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले टिम कुक अब अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उनकी जगह जॉन टर्नस (John Ternus) को कंपनी का नया सीईओ नियुक्त किया गया है, जो आधिकारिक तौर पर 1 सितंबर 2026 से अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। टिम कुक के कार्यकाल में एपल ने 4 ट्रिलियन डॉलर की मार्केट वैल्यूएशन का ऐतिहासिक आंकड़ा छुआ, जिसे अब टर्नस आगे बढ़ाएंगे। कुक पूरी तरह कंपनी से अलग नहीं हो रहे हैं, बल्कि वे अब 'एग्जीक्यूटिव चेयरमैन' की नई भूमिका में नजर आएंगे।
कौन हैं जॉन टर्नस?
50 वर्षीय जॉन टर्नस वर्तमान में एपल की हार्डवेयर इंजीनियरिंग यूनिट के प्रमुख हैं। उन्हें आईफोन, आईपैड और मैक जैसे लोकप्रिय डिवाइसेज के हार्डवेयर डिजाइन और विकास का मास्टरमाइंड माना जाता है। टर्नस का सफर काफी प्रेरणादायक रहा है; उन्होंने 1997 में यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और कुछ साल अन्य फर्मों में अनुभव लेने के बाद 2001 में एपल जॉइन किया। दिलचस्प बात यह है कि वह स्टीव जॉब्स द्वारा कंपनी को दिवालिया होने से बचाने के बाद से केवल तीसरे और एपल के इतिहास के 8वें सीईओ होंगे। टर्नस को कंपनी के अंदर एक शांत लेकिन बेहद प्रभावशाली लीडर के रूप में देखा जाता है।
जॉन टर्नस की संपत्ति और कमाई
टर्नस ने अपने जीवन के दो दशक से ज्यादा का समय एपल को समर्पित किया है, और उनकी वित्तीय स्थिति भी इसी स्थिरता को दर्शाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी वर्तमान नेट वर्थ लगभग 75 मिलियन डॉलर (करीब 600 करोड़ रुपये से अधिक) है। यह संपत्ति उन्होंने अपनी सैलरी, बोनस और कंपनी के स्टॉक ऑप्शंस के जरिए अर्जित की है। हालांकि, सीईओ का पद संभालते ही उनकी कमाई में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है। उन्हें टिम कुक जैसा ही पे-स्ट्रक्चर मिल सकता है, जिसमें सालाना करोड़ों डॉलर के स्टॉक अवॉर्ड्स शामिल होते हैं।
टिम कुक की विरासत और नेट वर्थ
65 वर्षीय टिम कुक का जाना अमेरिकी बिजनेस इतिहास के सबसे सफल दौरों में से एक का अंत माना जा रहा है। कुक की अपनी नेट वर्थ लगभग 2.53 बिलियन डॉलर के करीब है, जो मुख्य रूप से पिछले 28 सालों में मिले एपल के शेयरों से बनी है। साल 2024 में ही उन्होंने सैलरी और बोनस मिलाकर लगभग 74.6 मिलियन डॉलर की कमाई की थी। अब जॉन टर्नस के सामने चुनौती न केवल इस वित्तीय प्रदर्शन को बरकरार रखने की होगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नए हार्डवेयर इनोवेशन के दौर में एपल को सबसे आगे रखने की भी होगी।
