बिजनेस

चांदी के वो दो 'खलनायक' जिन्होंने हिला दी थी दुनिया, कौन थे हंट ब्रदर्स और क्या था खूनी खेल?

चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहे हंट ब्रदर्स। 1980 के दशक में इन्होंने सिल्वर मार्केट पर कब्ज़ा करने की कोशिश की, जिसका नतीजा चांदी की कीमतों में जबरदस्त उथल-पुथल और फिर बड़ी गिरावट के रूप में सामने आया। आखिर कौन थे हंट ब्रदर्स और कैसे उनकी रणनीति ने सिल्वर मार्केट को हिला दिया आइए जानते हैं?

Hunt Brothers Silver Crash

Hunt Brothers Silver Crash

जब भी चांदी की कीमतों में भारी गिरावट या किसी बड़े क्रैश की बात होती है, तो इतिहास के पन्नों से दो नाम हमेशा निकलकर सामने आते हैं नेल्सन बंकर हंट और विलियम हर्बर्ट हंट। इन्हें दुनिया 'हंट ब्रदर्स' के नाम से जानती है। ये वो दो अरबपति भाई थे जिन्होंने 1980 के दशक में पूरी दुनिया के चांदी के बाजार को अपने घुटनों पर ला दिया था। हाल ही में चांदी की कीमतों में जो 30% की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई है, उसने एक बार फिर लोगों को हंट ब्रदर्स के उस दौर की याद दिला दी है।

कौन थे हंट ब्रदर्स?

हंट ब्रदर्स अमेरिका के एक बेहद अमीर तेल कारोबारी एच.एल. हंट के बेटे थे। 1970 के दशक में जब अमेरिका में महंगाई बढ़ रही थी और डॉलर की वैल्यू गिर रही थी, तब इन दोनों भाइयों ने अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए चांदी को चुना। उन्हें लगा कि कागजी मुद्रा (Currency) कभी भी डूब सकती है, लेकिन चांदी जैसी धातु हमेशा कीमती रहेगी। इसी सोच के साथ उन्होंने चांदी को 'कोने' (Cornering the Market) करना शुरू किया, यानी दुनिया की अधिकांश चांदी खुद खरीदने की योजना बनाई।

चांदी को 'कैद' करने की साजिश

1973 से 1979 के बीच, हंट ब्रदर्स ने अपनी बेहिसाब दौलत का इस्तेमाल करके बाजार से चांदी खरीदना शुरू किया। उन्होंने न केवल फिजिकल चांदी खरीदी, बल्कि 'फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स' के जरिए भी भारी मात्रा में चांदी पर कब्जा जमा लिया। कहा जाता है कि एक समय उनके पास दुनिया की कुल चांदी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा (करीब 200 मिलियन औंस) था।

उनकी इस भारी खरीदारी का नतीजा यह हुआ कि चांदी की कीमतें आसमान छूने लगीं। जो चांदी 1979 में करीब $6 प्रति औंस पर थी, वह जनवरी 1980 तक बढ़कर $50 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। दुनिया भर के ज्वैलर्स, फोटोग्राफी कंपनियां (जो तब चांदी का इस्तेमाल करती थीं) और आम जनता इस महंगाई से त्राहि-त्राहि कर उठी। लोग अपने घरों के पुराने चांदी के बर्तन और सिक्के गलाकर बेचने लगे ताकि मुनाफा कमा सकें।

'सिल्वर थर्सडे' जब ताश के पत्तों की तरह ढहा साम्राज्य

बाजार में आई इस कृत्रिम तेजी को रोकने के लिए अमेरिकी नियामकों (Regulators) और एक्सचेंजों ने नियमों में अचानक बदलाव कर दिया। उन्होंने चांदी की नई खरीदारी पर रोक लगा दी और 'मार्जिन मनी' (गारंटी के तौर पर जमा की जाने वाली राशि) को कई गुना बढ़ा दिया। हंट ब्रदर्स, जिन्होंने उधार के पैसे पर चांदी का बड़ा दांव खेला था, इस नए मार्जिन कॉल को पूरा नहीं कर पाए।

नतीजतन, 27 मार्च 1980 को चांदी का बाजार धड़ाम से गिर गया। इस दिन को इतिहास में 'सिल्वर थर्सडे' कहा जाता है। चांदी की कीमतें $50 से गिरकर सीधे $11 के करीब आ गईं। हंट ब्रदर्स को एक ही झटके में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। उनकी साख मिट्टी में मिल गई और बाद के वर्षों में उन्हें दिवालियापन (Bankrupt) घोषित करना पड़ा। साथ ही, उन पर बाजार में हेरफेर करने के लिए भारी जुर्माना भी लगाया गया।

आज के बाजार के लिए क्या है सबक?

हंट ब्रदर्स की कहानी हमें सिखाती है कि जब भी किसी एसेट (जैसे चांदी) की कीमत वास्तविक मांग के बजाय सट्टेबाजी या कृत्रिम कमी के कारण बढ़ती है, तो उसका अंत बहुत बुरा होता है। वर्तमान में चांदी में आई 30% की गिरावट भी कुछ हद तक इसी ओर इशारा करती है कि कीमतें अपनी वास्तविक वैल्यू से बहुत ऊपर चली गई थीं। हंट ब्रदर्स का वो 'खूनी खेल' आज भी निवेशकों के लिए एक चेतावनी है कि बाजार में 'बुलबुला' जितना बड़ा होता है, उसके फूटने की आवाज भी उतनी ही तेज होती है।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। बिज़नेस (Business News) अपडेट और आज का सोने का भाव (Gold Rate Today), आज की चांदी का रेट (Silver Rate Today) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।

रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

End of Article